माँ ने बकरी चराकर जुटाए पढ़ाई के पैसे,विशाल ने 484वां रैंक लाकर लहराया UPSC में परचम

vishal upsc 484 rank sucess story

एक बेटे के सर पर पिता का साया जब उठ जाता है तब मानव जैसे संसार की सारी खुशी उनके साथ ही चली जाती है लेकिन इसके बाद भी फिर से खड़ा होकर विशाल ने यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पा लिया।

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2008 में हो गई थी पिता की मौत

बेहद गरीब घर से ताल्लुक रखने वाले विशाल के पिता की मौत साल 2008 में हो गई थी वह खुद मजदूरी कर कर अपने घर चलाने पर मजबूर थे।

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वह कहते हैं ना मेहनत और लगन से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है इसी बात को सच कर दिखाया है विशाल ने यूपीएससी द्वारा जारी किए गए सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम में विशाल ने पूरे देश में 484वां रैंक लाकर अपना परचम पूरे देश में लहरा दिया है।

देश के सबसे कठिन परीक्षा में लहराया परचम

देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक माने जाने वाला यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा मैं अपनी कड़ी मेहनत और लगन से विशाल ने इस मुकाम को अंततः हासिल कर ही लिया

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तमाम सुख सुविधा से कोसों दूर विशाल की जिंदगी बेहद गरीब घर में पली-बढ़ी है केवल मेहनत और संघर्ष से इस मुकाम को हासिल कर पूरे भारत को एक अच्छे विद्यार्थी होने का संदेश दे रहे हैं विशाल

पूरे देश में 484वां रैंक

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला के रहने वाले विशाल ने यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सर्विस परीक्षा 2021 में 484 वा रैंक लॉकर अपना परचम लहरा दिया है।

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विशाल के सफलता के बाद इनके गांव मकसूदपुर में जश्न और उत्सव का माहौल है उनके निजी आवास पर बधाई देने वाले लोगों की भीड़ जुट चुकी है इनसे सभी लोगों को प्रेरणा मिल रही है साथ ही साथ अपने बच्चों को इनकी सफलता की कहानी सुनाकर प्रेरित कर रहे हैं लोग

मां बकरी चरा कर पढ़ाती थी

विशाल काफी गरीब परिवार से आते हैं शुरुआती दिनों में उनकी पढ़ाई की खर्च जुटाने के लिए इनकी माता बकरी पालन कर कम आती थी थोड़े बहुत पैसे साल 2008 में हो चुकी थी पिता की मौत उसके बाद पूरी तरीके से बिखर चुका था परिवार

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पिता के जाने के बाद पूरी तरीके से घर की हालत खराब हो गई थी उसके बाद विशाल और उनकी मां रीना देवी ने बकरी और भैंस का पालन घर में किया और उससे जो भी थोड़े बहुत पैसे आते थे उससे घर चलाते थे दोनों लोग

शिक्षक को दिया पूरा श्रेय

विशाल के इस सफलता के पीछे इनके शिक्षक का बहुत बड़ा हाथ है विशाल ने अपने शिक्षक गौरीशंकर प्रसाद को श्रेय देते हुए कहा कि मेरे बुरे हालात में अगर गुरु ने साथ नहीं दिया होता तो शायद मैं इस मुकाम पर नहीं पहुंचता

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बता दें कि गौरीशंकर ने विशाल के मुश्किल हालात में उनकी मदद की थी पढ़ाई की फीस भरी थी जब पैसों की तंगी अत्यधिक थी तब अपने घर पर रख कर कर आते थे पढ़ाई

बचपन में पिता कहते थे बड़ा आदमी बनेगा मेरा बेटा

विशाल के स्वर्गीय पिता जी बिकाऊ प्रसाद बचपन में है विशाल की तारीफ करते हुए कहते थे कि मेरा बेटा बड़ा होकर एक सफल और अच्छा आदमी बनेगा

विशाल की पढ़ाई

साल 2011 में आयोजित मैट्रिक की परीक्षा में विशाल टॉपर रहा था इसके बाद साल 2013 में 12वीं पास कर आईआईटी कानपुर में लिया था एडमिशन

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आईआईटी कानपुर से 4 साल के बी टेक कोर्स करने के बाद रिलायंस कंपनी में विशाल की लगी थी जॉब उसके बाद अध्यापक गौरी शंकर ने उनसे कहा कि तुम्हें और मेहनत करने की जरूरत है और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा के बारे में बताया उसके बाद तैयारी में जुट गए विशाल