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बिहार की इन जनजाति महिलाओं के हाथों का हुनर बना महलों की शान, राष्ट्रपति मुर्मू भी बनी इनकी फैन

Tharu and Oraon Tribe Handloom Bihar: विकास की राह पर चल रहे बिहार में शहरों के साथ-साथ दूर दराज के क्षेत्र में भी स्वरोजगार की लहर चल रही है। जिससे बिहार का नाम देश विदेश में फैल रहा है।

इसी क्रम में आज हम आपको बिहार की पश्चिमी चंपारण जिले के दूर दराज जंगलों में रहने वाली थारू और उरांव जनजाति की महिलाओं के हुनर से रूबरू कराने जा रहे हैं। जिनके हाथों का कमाल देखकर राष्ट्रपति मुर्मू भी इनकी तारीफ करने से खुद को नहीं रोक सकी।

महिलाएं चलाती है हथकरघा

बिहार के चंपारण जिले के जंगलों को विशेष जनजातियों का आवासीय क्षेत्र माना जाता है। जहां थारू और उरांव जनजातीय लोग रहते हैं। यहां रहने वाले लोगों में विशेष कर महिलाएं  हथकरघा गृह उद्योग के माध्यम से बेडशीट, तकिया के कवर , टेबल क्लॉथ, शॉल, स्वेटर के बेहद ही खूबसूरत और आकर्षक डिजाइंस तैयार करती हैं।

पश्चिमी चंपारण के इन इलाकों में बगहा-2, मैनाटांड, गौनाहा, हरनाटांड़, रामनगर आदि में थारू जनजाति की महिलाएं हथकरघा उद्योग के माध्यम से परिवार को चलाती हैं। इनके द्वारा बनाए गए कपड़े पर ज्यादातर पारंपरिक कलाकृतियों की झलक देखने को मिलती है। खूबसूरत धागों का प्रयोग करके हथकरघा व चरखी के माध्यम से यह महिलाएं एक दिन में अच्छी संख्या में हथकरघा का उत्पाद तैयार कर लेती है।

राष्ट्रपति द्वारा मिली प्रशंसा

आपको बता दे जनजातीय महिलाओं द्वारा चलाए गए इस छोटे से केंद्र द्वारा पिछले वर्ष दिल्ली में आयोजित मेले में हथकरघा उद्योग द्वारा निर्मित इन खूबसूरत वस्तुओं का स्टाल भी लगाया गया था। जिसके अंतर्गत हाथों द्वारा कपड़े की बुनाई से तैयार की गई विभिन्न वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया था।

मेले का उद्घाटन करने पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भी चंपारण की आदिवासी महिलाओं की पहल को काफी सराहा गया था। आपको बता दें पश्चिम चंपारण के मिश्रौली गांव गांव की रुक्मिणी देवी के केंद्र में 25 महिलाएं काम करती  हैं।

मिली देश विदेश में पहचान

बिहार की इन जंगलों की आदिवासी महिलाओं के इस बेहतरीन काम को देश-विदेश में पहचान मिल रही है। खास तौर पर उनके द्वारा बनाए गए कपड़े को शाही घरानो में में काफी पसंद किया जाता है।

आदिवासी महिलाओं द्वारा निर्मित ये वस्तुएं देश के विभिन्न भागों में भी भेजी जाती हैं। जिनमें से मध्य प्रदेश, यूपी, पटना, दिल्ली झारखंड  सहित देश के अन्य राज्यों में इसकी काफी डिमांड रहती है।