बिहार के इस रेलवे स्टेशन पर सज रही है अनोखी पाठशाला, भीख मांगकर नशा करनेवाले बच्चे सीख रहे ककहरा

बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों एक अनोखी पाठशाला सज रही है जिसमें दर्जनभर से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं। इस पाठशाला में खास तरह के बच्चे पढाई करते है, ये वही बच्चे हैं, जो बचपन से ही नशे के आदि हो चुके थे। पूरा दिन उनका समय बोतल चुनने में बीतता था. वे तरह-तरह के नशे की गिरफ्त में आ चुके थे।

रेलवे चाइल्ड लाइन की मुहीम

दरअसल जब रेलवे चाइल्ड लाइन ने बच्चों को नशा करते हुए देखा था, तो स्थानीय रेल अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें पढ़ाने की पहल की. बच्चों को शिक्षित करने का जिम्मा रेलवे चाइल्ड लाइन ने लिया। रेलवे चिल्ड्लाइन का यह प्रयास अब रंग ला रहा है। रेलवे चाइल्ड लाइन के इस अनोखे प्रयास से शुरू यह पाठशाला रोजाना शाम में जमता है, कर्मचारी रोजाना बच्चों को पढ़ाते है। बच्चों ने बताया कि उन्हें पढ़ने में मजा आ रहा है।

करीब तीन महीने से यह पाठशाला चल रही है. बच्चों को ककहरा सहित अंग्रेजी के शब्दों की पहचान कराने के साथ ही बोलने और लिखने सिखाया जा रहा है. चाइल्ड लाइन में अनिता, कुमकुम, सोनी, गुंजा, श्यामली, चंदन, राजेश व अजय की तैनाती है. शाम के वक्त जिसकी भी ड्यूटी रहती है, वह बच्चों को पढ़ाने के लिए चला जाता है।

जगह की मांग

रेलवे चाइल्ड लाइन ने रेल प्रशासन से कई बार बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह की मांग की है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर पहल भी की जा रही है. रेलवे चाइल्ड लाइन के केंद्र समन्वयक अनिल कुमार ने कहा कि बच्चों को पढ़ाने के लिए महिला स्टॉफ को भी जिम्मेदारी दी गयी है. अभी खुले में ही पढ़ाई होती है. बच्चे दिलचस्पी दिखा रहे हैं. थोड़ी सुविधा मिल जायेगी, तो संख्या और बढ़ सकती है.

रेलवे चाइल्ड लाइन केंद्र समन्वयक अनिल कुमार ने बताया कि “अभी 14 बच्चे रेगुलर पढ़ाई कर रहे हैं. रोजाना उनका अटेंडेंस भी बनता है. सभी में पढ़ाई को लेकर काफी ललक है. शाम को खुद ही सभी स्लेट, पेन, पेंसिल व कॉपी लेकर आते हैं. चाइल्ड लाइन की ओर से उन्हें उपलब्ध कराया गया है. वे अब पढ़ने की बात कहते हैं, नशापान छोड़ चुके हैं.”