बिहार के इस गाँव में पुल के कारण नहीं होती है बेटियों की शादी, कई बार लौट चुकी है बारात

People Of Many Villages With The Help Of Chachari In Bhagalpur

बिहार के भागलपुर जिले का कई ऐसा गांव, जहां के लोग आज भी चचरी पुल के सहारे आवागमन करते हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। 40 वर्षों से इसी पुल के सहारे अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं।

लोगों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पुल नहीं रहने के कारण बेटी की शादी तक नहीं हो पाती है। शादी के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है।

Due to the bridge in this village of Bihar, daughters do not get married
बिहार के इस गाँव में पुल के कारण नहीं होती है बेटियों की शादी

ऐसा कई बार हुआ है, जब बारात आकर लौट गई है। मेहमान भी द्वार आने से परहेज करते हैं। बच्चे भी कई बार पुल पर से गिर गए हैं। लेकिन अभी तक पुल नहीं मिल पाया है।

नहीं होती बेटियों की शादी

माला देवी ने बताया कि पुल नहीं रहने के कारण बेटा बेटी की विवाह तय नहीं हो पाती है। दो बार बारात तक लौट कर चली गई है। जब बेटे के लिए रिश्ता आता है तो पुल को लेकर कई बार बात बिगड़ जाती है।

Marriage of son and daughter cannot be fixed due to absence of bridge.
पुल नहीं रहने के कारण बेटा बेटी की विवाह तय नहीं हो पाती है

यंहा मेरी बेटी कैसे रहेगी, हमलोगों को भी मिलने में परेशानी होगी। सरकार से मांग है कि एक पुल हमलोगों को दे। जिससे हमारी समस्या खत्म हो सके।

मिला है सिर्फ आश्वासन

वहीं स्थानीय लोगों ने बताया जब भी चुनाव आता है उस समय नेता के द्वारा आश्वाशन दिया जाता है। वादे किए जाते हैं, पक्की पुल बनाया जाएगा। लेकिन अभी तक पक्की पुल नहीं बन पाया है। गांव से गाड़िया भी लाने में ले जाने में परेशानी होती है।

अगर पक्की का पुल होता तो सुविधा होती है। अभी कोई भी जनप्रतिनिधि इसकी चर्चा तक नहीं करते हैं। हमलोगों को आस नहीं है की ये बन पाएगा।

चचरी के सहारे सभी काम

नाथनगर प्रखंड का रत्तिपूर बैरिया, दिलदारपुर, बिंद टोली समेत 5 गांव के लोगों का सहारा चचरी पुल ही है। इसी पुल के सहारे सभी काम होते हैं। इस गांव के लोगों की आजीविका किसानी पर आधारित है। पुल नहीं रहने के कारण खेती देर से होती है।

Chachari bridge is the only support for the people of 5 villages including Rattipur Bairia, Dildarpur, Bind Toli of Nathnagar block.
नाथनगर प्रखंड का रत्तिपूर बैरिया, दिलदारपुर, बिंद टोली समेत 5 गांव के लोगों का सहारा चचरी पुल ही है

ग्रामीणों ने बताया कि अभी लगभग लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है, लेकिन सामग्री ले जाने के लिए साधन नहीं है। ट्रैक्टर जाना नहीं चाहता है। घर कैसे बनायें।

पानी में बह जाता है पुल

ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष यह क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जाता है। इससे पुल हर वर्ष पानी में बह जाता है। गांव वाले चंदा इक्क्ठा कर फिर से पुल को बनाते हैं। हर वर्ष मेहनत करना पड़ता है और पैसे भी लगते हैं।

बाबजूद सुरक्षित तरीके से घर पहुंचना मुश्किल होता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि हमलोग भी आराम से गांव पहुंच पाएं। गांव की बड़ी गाड़ियों को 4 किलोमीटर दूर ही लगाना पड़ता है। मन में हमेश डर भी बना रहता है।