एक कुली, जिसकी बहादुरी से बची थी राजधानी, जानिए पटना जंक्‍शन पर कैसे पकड़ा गया था आतंकी

बिहार के लोग 27 अक्टूबर 2013 को कभी नहीं भूल सकते क्योंकि इसी दिन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के हुंकार रैली के दौरान कई बम विस्फोट हुए थे। सबसे पहला धमाका सुबह 9.30 बजे पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 10 के डीलक्‍स शौचालय में हुआ जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा जिसके बाद एक के बाद एक गाँधी मैदान में कई धमाके हुए।

बीते दिनों सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में चार आतंकियों को फांसी की सजा, दो को उम्रकैद दो को 10 वर्ष की सजा और एक को 7 वर्ष की सजा सुनाई है। गांधी मैदान और पटना जंक्शन में सिलसिलेवार बम विस्फोट में 6 लोगों की जानें चली गई थी, जबकि करीब 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

कुली के साहस से पकड़ा गया आतंकी

शक्तिशाली बम के धमाकों से शौचालय के खिड़कियों के शीशे चटक गए थे, तेज धुंआ निकल रहा था। इसी बीच धुंआ को चीरते हुए कंधे पर लाल गमछा रखे एक व्यक्ति शौचालय के अंदर प्रवेश करता है। शौचालय का गेट खुला हुआ था। सामने एक युवक बम के धमाके बाद घबराहट से पसीना-पसीना हो रहा था। वह डर से कांप रहा था।

कंधे पर गमछा रखे अधेड़ ने जब बगल वाले शौचालय में झांककर देखा तो एक अन्य युवक खून से लथपथ पड़ा था। उसे समझते देर नहीं लगी कि बम विस्फोट में इन दोनों का हाथ है। उसकी बहादुरी ने न केवल एक आतंकी को गिरफ्तार कराया, बल्कि पूरी घटना का पर्दाफाश करने में भी मदद की। वह पटना जंक्‍शन पर कुली का काम करने वाला धर्मा था।

इम्तेयाज को दबोचा था कुली ने

कुली धर्मा ने जिस डरे-सहमे युवक को पकड़कर शौचालय के एक कोने में ले जाकर बैठा दिया था वह कोई और नहीं बल्कि हार्डकोर आतंकी इम्तेयाज था। धर्मा कुली अगर इम्तेयाज को नहीं पकड़ता तो शायद गांधी मैदान ही नहीं बोधगया बम ब्लास्ट की घटना का पर्दाफाश नहीं होता।

पुलिस की टीम जब वहां पहुंचे और आतंकी इम्तेयाज के बैग की तलाशी ली तो बैग से एक जिंदा बम बरामद किया गया। शौचालय में दो और बम मिला।

गिरफ़्तारी के बाद खुलाशा 

गिरफ्तारी के बाद आतंकी इम्तेयाज ने ही पटना पुलिस के वरीय अधिकारियों को गांधी मैदान में होने वाले विस्फोट की सूचना दी थी। हालांकि तब तक आतंकी भीड़ में शामिल हो चुके थे। चेक शर्ट पहने आतंकी की तलाश पुलिस के लिए भारी पड़ गया था। हालांकि पटना पुलिस की तत्परता का ही परिणाम है कि गांधी मैदान में हुए इतने बड़े विस्फोट में भगदड़ से होने वाले बहुत बड़ी क्षति को रोक लिया गया।