लंदन की नौकरी छोड़ बिहार की नेहा ने शुरू किया “इको विलेज मॉडल”, आज करोड़ों में है रेवेन्यू

मूल रूप से बिहार के चम्पारण जिले की रहने वाली नेहा उपाध्याय आज अपने “इको विलेज मॉडल” को लेकर पूरे देश विदेश में नाम कमा रही है, एक तरफ जहाँ वह अपने इस मॉडल से करोड़ों रूपए का रेवेन्यू बना रही है वहीं दूसरी तरफ नेहा लद्दाख के सैकड़ों किसानों के जीवन को सवार रही है। नेहा की सोशल एंटरप्राइज, गुण ऑर्गनिक्स आज देश विदेश में अपने आर्गेनिक प्रोडक्ट्स को भेजती है।

आज से करीब दस साल पहले नेहा लंदन से अपनी मास्टर्स की डिग्री पूरी करने के बाद वही एक रिसर्च ऑफिसर के रूप में काम करने लगी थी लेकिन कुछ साल लंदन में काम करने के बाद अपने नौकरी को छोड़ वह भारत वापस आई और लोकल किसानों के साथ मिलकर ऑर्गेनिक फार्मिंग और इको विलेज मॉडल पर काम करना शुरू किया।

यहाँ से मिली प्रेरणा

लंदन में नौकरी करते वक्त नेहा का ज्यादातर समय बच्चों के बीच गुजरता था, उस वक्त वह बच्चों के लाइफस्टाइल और उनमें होने वाले डिसीज और फूड को लेकर रिसर्च कर रही थी। नेहा ने अपने रिसर्च के दौरान पाया कि अधिकतम बच्चों को सही फूड नहीं मिल रहा है और केमिकल बेस्ड फूड खाने से उन्हें तरह तरह की बीमारियां हो रही है।

बस इसी समस्या से प्रेरणा ले नेहा ने एक संस्थान से ऑर्गेनिक फार्मिंग का एक कोर्स किया, आर्गेनिक फार्मिंग और इसकी प्रोसेस को समझा, अलग-अलग एक्सपर्ट से मिलीं और फार्मिंग के बारे में जानकारी हासिल की। इतना सब करने के बाद नेहा ने भारत वापस आने की ठानी और तय किया की भारत में ही इस दिशा में कुछ पहल की जाए।

कई राज्यों में किया वर्कशॉप

लंदन से स्वदेश लौटने के बाद नेहा ने अपने जागरूकता अभियान के अंतर्गत देश के कई राज्य जैसे महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, लेह और लद्दाख आदि में वर्कशॉप किया। इस दौरान वह वहाँ के किसानों से मिलती उनके समस्याओं के बारे में बात करती है और उन्हें आर्गेनिक फार्मिंग के नए नए तरकीबें बताती।

इसी दौरान साल 2015 में नेहा को एक NGO संसथान की तरफ से लद्दाख में अवेयरनेस कैंप के लिए बुलाया गया, लद्दाख में गरीबी और माइग्रेशन की समस्या काफी थी लोग बाढ़ की वजह से भी बदहाल थे। बस क्या था नेहा ने लद्दाख के ही तकमाचिक गांव से अपने काम की शुरुआत कर दी।

लद्दाख के तकमाचिक गांव (Takmachik Village)  को सबसे पहले तो एक “इको विलेज मॉडल” के रूप में बदला, गांव के किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए ट्रेनिंग दिया साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट, सोलर ड्रायर समेत वो सारे रिसोर्सेज उन्हें उपलब्ध कराए जो खेती के लिए चाहिए होते हैं।

उन्होंने तकमाचिक गांव में जब अपने काम को शुरू किया था तब गांव में केवल 29 परिवार थे और आज वहां 75 परिवार रह रहे हैं, आज नेहा की वजह से 650 से भी अधिक किसानों का जीवन संवार रही हैं। नेहा बताती हैं कि हमारी पहल की वजह से तमाचिक गांव को वहां के लोकल प्रशासन की तरफ से इको विलेज का दर्जा मिल चुका है।

सभी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है प्रोडक्ट्स

आज के समय में गुण आर्गेनिकस के प्रोडक्ट्स जैसे खुबानी, खुबानी का तेल, बारले, बकबीट, मशरूम, और अखरोट-बादाम जैसे नट्स को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचा रहीं हैं। उनके प्रोडक्ट्स अमेज़न, इंडिया मार्ट सहित कई बड़े प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है साथ ही गुण आर्गेनिकस के ऑफिसियल वेबसाइट gunaorganics.com पर उपलब्ध है। नेहा अपने प्रोडक्ट्स के पैकेजिंग के लिए भी केवल इको फ्रेंडली मैटेरियल्स का इस्तेमाल करती है।

बिहार में भी करेगी विस्तार

नेहा बताती है कि वह जल्द ही अपने गृह राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अपने इस काम को विस्तार देगी, इस काम में पोटेंशियल की कोई कमी नहीं है सिर्फ जरूरत है तो बस लोगों को जागरूक करने की। आज गांव में हर तरह की सुविधाएँ उपलब्ध है जिस वजह से अलग लोग आगे बढ़कर ठान लें कि उन्हें अपने गांव को हर तरह से समृद्ध बनाना है तो वे कर सकते हैं।

नेहा को उसके इस सफल और अनोखे प्रयास के लिए कई तरह के अवार्ड और पुरस्कार से सम्मानित किया जा चूका है, अर्थ डे नेटवर्क स्टार, IIT दिल्ली की तरफ से इंट्रप्रेन्योर एक्सीलेंस अवॉर्ड तथा ब्रिटिश काउंसिल की तरफ से सोशल इंडिया इम्पैक्ट अवॉर्ड उन्हें प्राप्त हो चूका है।