बिहार में है एशिया का एकमात्र गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य, लेकिन गंगा की मुस्कान बचाने की है जरूरत

आज यानि दिन मंगलवार 5 अक्टूबर को पूरे देश में राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस मनाया जाता है, जलीय जीव डॉल्फिन को केंद्र सरकार ने तक़रीबन चार साल पहले राष्ट्रीय जल जीव घोषित किया था। जिससे कि उसका बेहतर संरक्षण हो सके। लेकिन आज भी लोग इसका शिकार करते हैं और कई अन्य कारणों से भी इसकी संख्या घटती जा रही है।

एकमात्र गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य बिहार में

एशिया का एकमात्र गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य बिहार के भागलपुर जिले में ही है, जिले के सुलतानगंज जहांगीरा से बट्टेश्वर स्थान का 60 किलोमीटर जल मार्ग में डॉल्फिन पाये जाते हैं। लोग सूर्य के उदय व अस्त के समय गंगा में अटखेली करती डॉल्फिन का दीदार कर सकते हैं।

अभी 250 से अधिक डॉल्फिन

वन विभाग के मुताबिक 60 किलोमीटर गंगा डॉल्फिन अभ्यारण में अभी 250 के आसपास डॉल्फिन है, और अक्सर इस क्षेत्र में डॉलफिन को देखा जाता है। ऐसे में डॉल्फिन के प्रति लोगों के बीच जागरूकता लाने की जरूरत है जिसके लिए सरकार अपने स्तर से काम भी करती आ रही है।

संरक्षण की जरूरत

लेकिन आज के वक्त में डॉल्फिन को संरक्षित करने की एक बड़ी चुनौती सामने है, कई कारणों से हर वर्ष डॉलफिन के मरने की खबर आती रहती है। हालांकि धीरे-धीरे इस इलाके में इसकी संख्या बढ़ रही है, अभी इसकी संख्या 250 के आसपास है, जो सुखद है। डॉल्फिन को स्थानीय लोग सोंस के नाम से जानते है।