बिहार को 1336 करोड़ का राजस्व नुकसान, CAG की रिपोर्ट से खुली सरकार की पोल
नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक यानि कैग (CAG) ने बीते दिनों गुरुवार को 2018-19 वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट जारी कर दी है, रिपोर्ट में बिहार को लेकर कई तरह के खुलासे सामने आए हैं। रिपोर्ट देखने के बाद सरकार की अनियमितताएं की भी बात सामने आई हैं। अगर मनरेगा की बात करें तो 2014 से 2019 के बीच 26 से 36 फीसदी लोगो द्वारा रोजगार मांगा गया था, लेकिन केवल 1 से 3 परसेंट मनरेगा मजदूरों को ही 100 दिनों का रोजगार मिल सका है। इसी तरह से कई अन्य विभागों के भी आकड़े चौकाने वाले है।
बिहार सरकार ने स्वीकार किया है कि अप्रैल 2018 से फरवरी 2020 तक 1336.65 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। लेखा परीक्षक ने 629 मामलों में 3658.11 करोड़ के अवनिर्धारण राजस्व (Underassessment Revenue) हानि का पता लगाया है। संबंधित विभागों ने 1 हजार 648 मामलों में 1336.65 करोड़ के अवनिर्धारण और दूसरे कमियों को स्वीकार किया है।
इसमें 366.27 करोड़ के 55 मामले 2018-19 के दौरान और बाकी पिछले सालों के हैं। सरकारी विभागों ने 196 मामलों में 8.90 करोड़ की वसूली अप्रैल 2018 और अप्रैल 2020 के बीच किया। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बिहार सरकार की कुल प्राप्ति 131793.45 करोड़ थी। जिसमें से राज्य सरकार के स्रोत से 33538.70 करोड़ यानी 25.45% था। भारत सरकार से प्राप्ति का हिस्सा 98254.75 करोड़ यानी कुल प्राप्ति का 74.55% था। जिसमें से संघीय करो में राज्य का हिस्सा 73603.13 करोड़ यानी कुल प्राप्ति का 55.85% और सहायता अनुदान 24651.62 करोड़ यानी कुल प्राप्ति का 18.70% था।

