बिहार में यहाँ कश्मीर जैसा नजारा, इतने ऊंचाई से गिरता है पानी, तेज गर्मी में भी रहती है ठण्ड

kakolat waterfalls bihar

जी हाँ बिहार के इस जगह पर आपको कश्मीर जैसा नजारा देखने को मिलेगा। हम बात कर रहे है बिहार की राजधानी पटना से 133 किमी की दूरी पर स्थित ककोलत जलप्रपात की। इसे लोग बिहार का कश्मीर भी बोलते हैं। इसकी तुलना अमेरिका के नियाग्रा जलप्रपात से की जाती है।

ककोलत को ‘नियाग्रा ऑफ बिहार’ भी कहा जाता है। यह नवादा जिले में पहाड़ियों से घिरा हुआ है। गर्मी की शुरुआत होते ही यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगती है।

क्या है धार्मिक मान्यता?

करीब 150 मीटर की ऊंचाई से यहां पानी गिरता है, जो इसकी खूबसूरती को और भी बढ़ाता है। ककोलत जलप्रपात को लेकर धार्मिक मान्यता है कि महाभारत काल में ककोलत के समीप एक ऋषि के श्राप की वजह से राजा निग्र गिरगिट के रूप में वास करते थे।

Crowd of tourists at Kakolat Falls
ककोलत जल प्रपात में पर्यटकों की भीड़

अज्ञातवास के दौरान पांडवों के आने से वे श्राप से मुक्त हुए थे। ककोलत जल प्रपात पहुंचने के एक किलोमीटर पहले से ही ठंडी हवाएं आपका स्वागत करने लगती है।

करीब 150 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला पानी कई पहाड़ियों से गुजरते हुए यहां गिरता है। पानी के श्रोत के बारे में कई बार जानकारी लेने की कोशिश की गई। लेकिन, इसका पता नहीं चल सका।

रहने की व्यवस्था नहीं

ककोलत जल प्रपात कभी नक्सल प्रभावित इलाके में आता था। यहां आने से पहले लोगों को काफी कुछ सोचना पड़ता था। लेकिन, समय बदला तो व्यवस्थाएं भी बदली।

Board only in the name of convenience from the Department of Tourism
पर्यटन विभाग की ओर से सुविधा के नाम पर सिर्फ बोर्ड

सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल धीरे-धीरे खत्म होने लगे। बड़ी संख्या में लोग अब यहां पहुंचते हैं। यहीं ककोलत के पानी में ही पर्यटक भोजन भी बनाते हैं।

यहां के पानी में भोजन भी बहुत जल्दी पकता है। साथ ही स्वाद भी गजब का होता है। हालांकि, शाम के बाद पर्यटक ककोलत जल प्रपात से निकलने लगते हैं। क्योंकि, अब तक यहां रहने की व्यवस्था नहीं की गई है।

बाढ़ और भूस्खलन से बर्बाद हो चुके हैं कई काम

1994-95 में जलप्रपात तक पहुंचने के लिए चार फीट चैड़ी सीढ़ी, स्नान आदि की व्यवस्था की गई थी। इस राशि से पर्यटकों के लिए कुंड का निर्माण किया गया। लेकिन, ककोलत में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण सब बेकार हो गए हैं।

फिलहाल ककोलत में बेरेकेडिंग और महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम भी नहीं है। जर्जर भवन में महिलाएं कपड़ा बदलती है। पुराना गेस्ट हाउस अब खंडहर में तब्दील हो गया है।

Water falling from a height of 150 meters
150 मीटर की ऊंचाई से गिरता है पानी

अभी भी विकास का इंतजार

प्रदेश में कई सरकारें आई और गई। लेकिन, लेकिन ककोलत का कायापलट नहीं हो पाया। ककोलत आज भी किसी तारणहार का इंतजार कर रहा है।

यहां सौंदर्यीकरण की योजना वर्ष 2009 में भी बनी थी। लेकिन वन भूमि के चलते इसके निदान में छह साल लग गए। 2015 में 12.3 एकड़ भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया के बाद 11.65 करोड़ रुपए की योजना से वन विभाग के जरिए काम शुरू हुआ।

2018 तक 2.27 करोड़ से सीढ़ियां, तीन कल्वर्ट जैसे कुछ काम हुए। लेकिन, अभी तक रात में रूकने के लिए गेस्ट हाउस नहीं बन सका है।