बिहार: परचून की दुकान से MBBS तक का सफर, डॉक्टर बनने की थी जिद, तीसरी बार में मिली सफलता
कहते है कि जिस चीज़ को आप दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है और इसी कहावत का एक ताजा उदहारण है बिहार की रहने वाली दीपमाला। जिसने अपने सपने को मरने नहीं दिया और अपने लक्ष्य से बिना भटके MBBS में दाखिला लेने का सपना साकार किया है।
दीपमाला एक MBBS डॉक्टर बनना चाहती है और पिछले दो बार से NEET क्वालीफाई करने के वाबजूद उसे जब MBBS में दाखिला नहीं मिला तो उसने हिम्मत नहीं हारी। वह अपने लक्ष्य से नहीं भटकी। अब इस बार उसने अपना सपना पूरा कर लिया है। उसे 720 में से 626 अंक मिले हैं।
लक्ष्य को नहीं बदला
साल 2019 में दीपमाला ने NEET क्वालीफाई किया लेकिन कम रैंक आने की वजह से पटना आयुर्वेदिक कॉलेज में BAMS (Bachelor of Ayurveda, Medicine, and Surgery) में दाखिला मिल रहा था। लेकिन, दीपमाला MBBS करना चाहती थीं। इसी वजह से परिजन और लोगों के कहने के बावजूद उसने एडमिशन नहीं लिया।
2020 में दोबारा NEET की परीक्षा में बैठी इस बार फिर BAMS में ही दाखिला मिल रहा था। 5 अंक से MBBS छूट गया। लेकिन, कुछ कर जाने का जज्बा व हौसला बुलंद हो तो गरीबी आड़े नहीं आती। उन्होंने दोबारा एडमिशन नहीं लिया।
तीसरी बार में मिली सफलता
दीपमाला फिर से 2021 में NEET का एग्जाम दी। तीसरी बार NEET क्रैक कर ऑल इंडिया रैंक 9420 ले आईं। वहीं, कैटेगरी रैंक 3538 मिला है। इस बार MBBS में दाखिला का रास्ता साफ हो गया है। इलाके में उसके इस मेहनत की खूब चर्चा हो रही है। दीपमाला ने वाल्मीकिनगर स्थानीय स्कूल नदी घाटी उच्च विद्यालय वाल्मीकिनगर से इंटर की पढ़ाई की है। सेल्फ स्टडी से उसने यह मुकाम हासिल किया है।
परिवार में ख़ुशी का माहौल
दीपमाला पश्चिम चम्पारण जिले के बगहा के वाल्मीकिनगर की रहने वाली है, उनका परिवार बेहद ही साधारण परिवार है। उसके माता-पिता पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर में अलग-अलग जगहों पर कॉस्मेटिक की दुकान सड़क किनारे लगाते हैं और होनहार बिटिया उसमें उनका हांथ बटांती है।
बिटिया परिवार के काम में हाथ बताने के साथ साथ पढ़ाई भी करती है। लगातार तीसरी बार सफलता मिलने पर उसके घर वाले खुश हैं। हालांकि घरवाले बस इतना ही जानते हैं कि लड़की अब डॉक्टर बन जाएगी।

