बिहार: साइबर अपराध के मामलों में थानेदार को तुरंत दर्ज करनी होगी प्राथमिकी, DGP का निर्देश

तकनीक के साथ लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध को ध्यान में रखते हुए बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने बुधवार को सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को सख्त निर्देश जारी किया है, डीजीपी के निर्देश में साफ़ तौर पर कहा गया है कि साइबर क्राइम का मामला सामने आते ही थानेदार एफआईआर दर्ज करेंगे और उनकी कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। डीजीपी ने यह भी कहा है कि साइबर अपराध और इसके अनुसंधान में सहयोग के लिए बनाए गए साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट (सीसीएसएमयू) के काम की हर क्राइम मीटिंग में अलग से इसकी समीक्षा की जाए। समीक्षा के बाद संबंधित रिपोर्ट को यूओयू को भेजने का भी निर्देश डीजीपी द्वारा दिया गया है।

आम लोगों को सहूलियत

डीजीपी के इस निर्देश के बाद अब साइबर क्राइम से जुड़े मामलों में लोगो को इधर उधर भटकना नहीं होगा, थानेदार एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी नहीं कर सकते हैं, ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। दरसल कोरोना काल में साइबर अपराधी अपराध के लिए अलग अलग तकनीकों को अपना रहे है जिससे निअपटाना पुलिस तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

74 साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट का गठन

आपको बता दे कि सीसीएमयू साइबर क्राइम के मामले में हो रही जांच में तकनीकी सहयोग करती है और उसकी इसमें बेहद अहम भूमिका भी मानी जाती रही है। अपने राज्य बिहार में कुल 74 सीसीएमयू स्थापित हैं और इसका इंचार्ज पुलिस इंस्पेक्टर के स्तर के अधिकारी को बनाया जाता है। एक मीडिया संसथान से बातचीत के दौरान बिहार पुलिस मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश जिलों में सीसीएमयू यानी सोशल साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट का इंचार्ज ऐसे लोगों को बनाया गया है जिन्हें साइबर क्राइम के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।

कुल मिलाकर बात यह है कि SP सीसीएमयू के काम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं ऐसे में डीजीपी ने कहा है कि सीपीएमयू के अफसरों को आवश्यकतानुसार दोबारा आर्थिक अपराध इकाई यूनिट में ट्रेनिंग भी दिलवाया जा सकता है।  गौरतलब है कि करोना कॉल में साइबर अपराधियों ने बिहार में पुलिस के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.