रेल दुर्घटना को टालने के लिए रात में भी कर्मचारी रहते हैं मुस्तैद, ऐसे काम करते हैं गैंगमैन

Employees are ready even at night to avoid rail accident

जाड़े के दिनों में रेल कर्मचारी रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक पीठ पर बैग लेकर ट्रैक पर 20 से 24 किलोमीटर के बीच पैदल चलते हैं। इस दौरान उन्हें अपनी जान भी जोखिम में डालनी पड़ती है। यह पेट्रोलिंग कई बार रेल हादसों को रोकने में कारगर साबित हुई है। खास बात यह है कि सर्दी के मौसम में रेल विभाग के कर्मचारी रोजाना पटरी पर उतर जाते हैं।

Railway employees stay overnight to avoid accidents

स्टेशनों के बीच होती है गश्ती 

सर्दी के मौसम में लोहा सिकुड़ जाता है, ऐसे में रेलवे ट्रैक में दरार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी आशंका के चलते रेल विभाग सर्दी के दिनों में अलग रणनीति के तहत गश्त करता है। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने कहा कि रेलवे विभाग के गिरोह के सदस्य दोनों स्टेशनों के बीच निर्धारित बिंदुओं पर गश्त करते हैं।

रात्रि गश्त पर दोनों कर्मचारी विपरीत दिशाओं में जाते हैं। इस दौरान वे 4 से 5 किलोमीटर का सफर तय कर मिलते हैं। इस दौरान उनके पास एक बैग होता है जिसमें ट्रेन की पटरी की मरम्मत के लिए जरूरी उपकरण मौजूद होते हैं।

एहतियात के तौर पर रेल विभाग रात में गश्त करता है। गैंग के सदस्यों के अलावा अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग के जरिए सत्यापन अभियान भी चलाते हैं। जो कर्मचारी अपने कर्तव्य से अवगत नहीं है, उसके खिलाफ भी उपाय किए जाते हैं।

जीपीएस घड़ी लेकर गश्त पर निकलते हैं कर्मचारी

रेल कर्मचारी हाथ में हथौड़े, कंधों पर बैग और गले में जीपीएस घड़ी लेकर गश्त पर निकलते हैं। कई जगह पटारिस मारते नजर आ रहे हैं। पेट्रोलिंग कार में मौजूद कर्मियों के पास 14 अलग-अलग तरह के उपकरण होते हैं। इनमें टॉर्च, सीटी, बैग और अन्य सामान शामिल हैं।

रेलवे कराता है जूते और कोर्ट उपलब्ध

रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने कहा कि रेल विभाग कर्मचारियों को पेट्रोलिंग के स्तर को लेकर सुविधाएं मुहैया कराता है। इसके नीचे कर्मचारियों को जूते और कोट भी दिए जाते हैं। इसके अलावा आला अधिकारी भी लगातार कर्मचारियों के संपर्क में हैं। कहा जाता है कि एक कर्मचारी रात में ट्रेन के यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर 20 से 24 किलोमीटर पैदल चलता है।

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