मुनाफा ही मुनाफा! बिहार के किसानों की पहली पसंद बना ड्रैगन फ्रूट, खेती से कर रहे लाखों की कमाई

इंटरनेट और आधुनिकता के कारण अब गांव में भी किसान पारम्परिक खेती को दरकिनार कर अलग अलग तरह से नए तरीके की खेती कर रहे है। इसी का एक उदहारण है बिहार का मोतिहारी जिला। जी हाँ, मोतिहारी जिले के कुछ युवा किसान अब ड्रैगन फ्रूट की खेती की तरफ रुख करने लगे हैं। इतना ही नहीं बिहार के किशनगंज में भी कई किसानों ने इस नए तरह की खेती को शुरू किया है और आज अच्छा मुनाफा कमा रहे है।

मोतिहारी के रहने वाले रितेश पांडे ने ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की और अपने मेहनत और लगन से अच्छा मुनाफा कमाया। फिर क्या था, रितेश से इंस्पायर होकर उनके आसपास के कई युवा ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए आगे आए और इसकी शुरुआत की। फिलहाल रितेश इस चीज को लेकर अपना ट्रेनिंग भी चला रहे है। ड्रैगन फ्रूट को कमलम नाम से जाना जाता है।

कई बिमारियों में होता है इस्तेमाल

ड्रैगन फ्रूट की मुख्यता तीन किसमें होती हैं. इस फल की विशेषता यह है की ये डायबिटीज , कैंसर , गठिया , पेच संबंधी समस्या जैसी बीमारियों की अवस्था में काफी लाभकारी माना जाता है। इसका इस्तेमाल रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में किया जाता है और यही वजह है की बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है।

क्या है ड्रेगन फ्रूट?

ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का है. इसमें पानी की खपत बहुत कम होती है और इसके पौधे में कीड़े नहीं लगते. विदेश में ड्रैगन फ्रूट की मांग अधिक है जिस कारण इस फल की कीमत भी अधिक है। ड्रैगन फ्रूट सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें काफी मात्र  में  एंटीऑक्सी डेंट के गुण मौजूद होते हैं। इस फल का प्रयोग कई बीमारियों में लाभदायक माना गया है।

फिलहाल बिहार के कई जिलें जिसमें सहरसा, पूर्णिया, सुपौल, खगड़िया, किसनगंज, अररिया, मोतिहारी और नालंदा शामिल है किसान पारम्परिक खेती के साथ साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे है। बिहार के अलावा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में किसान ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कर रहें हैं।

एक सीजन में कई बार लगता है फल

युवा किसान रितेश बताते हैं की ड्रैगन फ्रूट एक सीजन में कम से कम तीन बार फल देता है . कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है. बरसात को छोड़कर आप किसी भी मौसम में इसके पौधे या बीज का रोपण कर सकते हैं. मार्च से जुलाई के बीच में इसके पौधे और बीज लगाने के लिए बेहतर समय होता है। इस पौधे की खासियत यह है कि एक बार लगने के बाद यह 25 साल तक फलता रहता है।

बताते चले कि इसके एक पौधे से आठ से दस फल प्राप्त होता है जहाँ एक फल का वजन करीब तीन सौ से पांच सौ ग्राम होता है। इसकी मूल्य आमतौर पर काफी अधिक होती है, ये बाज़ारो में तीन सौ से चार सौ रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बड़े ही आसानी से बिकते है।