बिहार: महापर्व को लेकर बिकने लगे मिट्टी के चूल्हे, जानिये कैसा है बाजार का मिजाज

मिट्टी का चूल्हा बनते देखकर ही आस्था के महापर्व छठ के प्रसाद की सोंधी खुश्बू आने लगती है और इसी महापर्व को देखते हुए शहर में छठ पर्व के लिए मिट्टी के चूल्हों का बिकना शुरू हो गया है। चूंकि छठ बिहार का सबसे बड़ा पर्व है, इसलिए यहीं की मिट्टी से बने चूल्हे का प्रसाद से गहरे अपनापन का बोध होता है।

छठ को लेकर बाजारों में रौनक

दिवाली के बाद से ही बाजारों में छठ पूजा को लेकर तैयारियां दिखनी लगी है, पटना के बाजार में पिछले कुछ दिनों से रौनक है और छठ को लेकर खरीददारी भी तेज हो गई है। राजधानी के बाजारों में छठ की खरीदारी के लिए मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ियां बाजार में सज चुकी हैं। कई चौक चौराहों और फुटपाथों पर मिट्टी के चूल्हे लेकर कुम्हार डेरा डाल चुके हैं।

क्या है चूल्हों और जलावन का रेट

पर्व के लिए अलग-अलग साइज के चूल्हे तैयार किये जा रहे हैं. इनके रेट भी अलग-अलग हैं, आमतौर पर चूल्हों की कीमत 150 से लेकर 200 तक की है। चूल्हों के साथ ही जलावन के लिए लकड़ियों की बिक्री भी शुरू हो गई है जिसमें प्रमुख रूप से आम की लकड़ियों उपलब्ध है। जिसे 30 रूपए किलो के आसपास के दरों पर मिल रही है।

आपको बता दे कि जैसे-जैसे छठ नजदीक आता जाएगा, लोग बाजार में जुटने लगेंगे, 8 नवंबर को नहाय खाय से छठ पूजा शुरू होगा तथा 10 और 11 नवंबर को छठ पर्व के लिए अर्ध्य दिया जाएगा।

क्या है वैज्ञानिक मान्यता 

वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मिट्टी में ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जिससे स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। एल्युमीनियम बर्तन में खाना पकाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व, पीतल के बर्तन में 7 प्रतिशत पोषक और कांसे के बर्तन में 3 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। मिट्टी के बर्तन ही ऐसे हैं, जिनमें खाना बनाने से 100 प्रतिशत पोषक तत्व शरीर को मिलते हैं। इसके अलावा भी मिट्टी के बर्तनों में खाना खाने या खाना पकाने के कई फायदे हैं।