छठ महापर्व पर बिहार से लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में रही धूम, देखे तस्वीरें
काचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए… छठ का यह प्रसिद्ध गीत जो कभी बिहार के अंदर गूंजा करता था, आज पूरी धरती को गूंजायमान कर रहा है। सूर्य अराधना का लोक महापर्व छठ अब लोकल से ग्लोबल हो चुका है।
आज दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा हो जहां बिहारी रहते हों और छठ पर्व नहीं मनाते हों। अपनी विशिष्ठ प्रकृति और कड़े नियमों के कारण इस त्योहार ने दूसरी विरादरी के लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है।

यहां तक कि हिंदू धर्म के पारंपरिक द्वेषी भी छठ के प्रति आदर का भाव रखते हैं। इसमें शामिल भी होते हैं। इस पर्व के दौरान इंसान- इंसान में कोई फर्क नहीं रह जाता।
छठ पर्व हो रहा ग्लोबल
छठ पर्व के लोकल से ग्लोबल होने के कई कारण हैं। इस व्रत के ग्लोबलाइजेशन का सबसे बड़ा कारण है बिहार के लोगों के अंदर परदेस के प्रति आकर्षण। जबकि ज्यादातर मानव होम सीकनेस अर्थात गृहताप से ग्रसित होते हैं।

अपनी जन्मभूमि के बाहर नहीं निकलना चाहते। बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों में ऐसी कोई ग्रंथि नहीं है। वे कहीं भी जाने को तैयार रहते हैं।
यही कारण है कि उन्हें जहां कहीं भी रोजगार का अवसर दिखा, निकलते चले गए। कुछ स्थाई तो कुछ अस्थाई रूप से। लेकिन वे जहां भी गए अपनी संस्कृति और रीति रिवाजों को साथ लेते गए।
सूर्य पूजा का सबसे बड़ा व्रत छठ पूजा
छठ पूजा को सूर्य पूजा का सबसे बड़ा व्रत मानते हैं। जो लोग पुर्वांचल से अन्य देशों में गए उन्होंने छिटपुट तरीके इसकी शुरुआत हुई लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक रूप लेता गया।

आज यह कनाडा, अमेरिका,रूस, ब्रिटेन और इटली समेत 20 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। 2020 में लंदन में टेम्स नदी के किनारे छठ के मौके पर फिल्मी सितारों का जमघट लगा था। वहां शूटिंग भी हुई थी। इस तरह गंगा से निकलकर छठ टेम्स तक पहुंच चुका है।
#छठ की छटा संयुक्त अरब इमारात (UAE) की राजधानी आबू धाबी में। pic.twitter.com/qxpddri79x
— Bihar Foundation (@biharfoundation) October 31, 2022
प्रवासी भारतीय अपने पर्व त्योहारों के जरिए संगठित होते गए और उनका एक समाज बनता गया। आज उनकी कई पीढियां गुजर चुकी हैं। लेकिन वे तमाम भारतीय पर्व त्योहार धूमधाम से मनाते हैं।

आज भी वे छठ के मौके पर कांचहि बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए जैसे गीत गाते हैं। यह गीत कई सदियों की वाचिक परंपरा का हिस्सा रहा है।
#ChhathPuja2022 in Melbourne, Australia
Venue: Karkarook Park, Heatherton, Victoria
Sandhya Araghya – Sun, Oct 30 (6 PM – 9 PM)
Praatah Araghya – Mon, Oct 31 (6 AM – 9 AM)To join the celebrations pls contact @BJSMAusNZ#BiharFoundationChhathpic.twitter.com/GpgXbLV7nZ
— Bihar Foundation (@biharfoundation) October 28, 2022
लोगों का मानना है कि इसका सकारात्मक, नकारात्मक प्रभाव तत्काल पड़ता है। मनोकामनाएं तुरंत पूरी होती हैं। इस कारण भी यह गैर बिहारियों को आकर्षित करता है।


