नितीश सरकार ने नहीं दिया पंचायत प्रतिनिधियों को एक्टेंशन, परामर्शी समिति का होगा गठन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज मंगलवार (1 जून) को तकरीबन 20 दिनों के बाद मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई जिसमें बिहार के पंचायती राज व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल कोरोना काल के दौरान बिहार में त्रिस्‍तरीय पंचायत चुनाव टल रहा है साथ ही 15 जून को बिहार के लगभग 8 हज़ार से अधिक पंचायतों के वर्तमान ढ़ाई लाख जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्‍म हो रहा है।

मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की इस अहम बैठक में कुल 18 एजेंडों पर मुहर लगी है. बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि “बिहार में पंचायत चुनाव नहीं होने की स्थिति में बिहार में पंचायत, ग्राम कचहरी, पंचायत समिति, जिला परिषद में परामर्शी समिति का गठन किया जाएगा l”

बिहार कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि बिहार के पंचायतों में परामर्शी समिति की नियुक्ति होगी जो ग्राम पंचायत में निहित सभी शक्ति और कृतियों का प्रयोग या संपादन करेगी। फिलहाल बिहार कैबिनेट ने जिस परामर्शी समिति को बनाने का निर्णय लिया है उस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जायेगा।

बिहार सरकार के इस फैसले के बाद से यह बिलकुल स्पष्ट हो गया है कि बिहार के सभी पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल का विस्तार नहीं किया जायेगा, त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को एक्टेंशन नहीं मिलने से उनका कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जायेगा।