बिहार का लाल कूड़े-कचरे से डीजल बनाकर कमा रहा है लाखों रुपए, लागत मात्र 6 रुपए कमाई अंधाधुन
महज ₹6 के प्लास्टिक के कचरे से बायोडीजल प्लांट से जिसके माध्यम से तैयार होता है डीजल जिसकी कीमत होती है ₹62 सुनकर आश्चर्यचकित नहीं हो क्योंकि यह खबर पहले भी सामने आ चुकी है|

रिपोर्टर-कहां से आया यह आईडिया
बेसिकली आइडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का था 2019 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने पराली और प्लास्टिक का समाधान युवाओं को करने को कहा था हमने पराली और प्लास्टिक दोनों का समाधान निकाला यह उस समय का आईडिया था 2019 का जो प्रोसेस है वह थर्मो कैटलाइजेशन मेथड है। जिसकी मदद से प्लास्टिक कचरे को अलग-अलग फॉर्म के मेट्रो केमिकल में कन्वर्ट कर दिया जाता है।

रिपोर्टर- जब मैं यहां पहले आया था तो बहुत छोटा सा था प्लांट आज यह बहुत बड़ा हो चुका है
सबसे बड़ी बात है कि जब हमें छोटे से यूनिट के ऊपर रिसर्च में थे तब और उसके बाद हम आगे बढ़ना शुरू किया साइंटिस्ट के साथ इन सारी चीजों को कवर किया जो प्रोसेस था थर्मो कैटालिटिक वह एक वेल नोन प्रोसीजर जिस प्रोसेस के मदद से हम लोग इस पूरे प्रोसीजर को बाहर कर रहे हैं और कुछ प्रोसेस की मदद से हम लोग बाइक खेलते हैं अल्टरनेट खेलते हैं उसके रिजल्ट पर पहुंच रहे हैं।

रिपोर्टर-कैसे इसकी जानकारी दीजिए कैसे यह काम करता है
मशीन का जो रिएक्टर वाला हिस्सा है उसमें कैटालिस्ट के मदद से प्लास्टिक को एक शर्ट एंड टेंपरेचर पर हिट किया जाता है हिट करने के बाद उस प्लास्टिक के जो पेपर होते हैं मॉलिक्यूल सोते हैं उनको कंडेंस के करते है।

रिपोर्टर- प्लास्टिक कचरा कहां से खरीदते हैं।
प्लास्टिक का कचरा जो कूड़े कचरे बनते हैं गली मोहल्ले के उनसे ₹6 प्रति केजी हम लोग खरीदते हैं। उसके बाद उस प्लास्टिक का यूज करके डीजल बना देते हैं।

रिपोर्टर- अभी कितना उत्पादन होता है 1 दिन का
अबे 300 लीटर पर स्विफ्ट का उत्पादन हो रहा है 1 दिन में लगभग 600 लीटर का उत्पादन किया जाता है। इनके प्रोडक्ट का डिमांड इतना अधिक बढ़ गया है कि इनके पास सामान की शॉर्टेज भी हो जाती है।


