बिहार: निजी जमीन पर लगाइये 200 पौधे, चापाकल के साथ मिलेगी 480 दिनों की मजदूरी
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बिहार के नितीश सरकार की हमेशा से ही प्रशंसा होती रही है, राज्य में वृक्षारोपण का कार्य युद्धस्तर पर होता आ रहा है। इसी क्रम में बिहार सरकार एक बार फिर से निजी जमीन पर पौधारोपण को बढ़ावा देने की योजना को सफल बनाने के लिए कई सहूलियतें दे रही है।
अगर आप बिहार से है और अपने निजी जमीन पर वृक्षारोपण करते है तो राज्य सरकार आपको मनरेगा से श्रमिक देगी साथ ही पौधों की सिचाई के लिए उस स्थान पर सरकार चापाकल भी लगायेगी।

जानिए क्या है लक्ष्य
बिहार सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य के सभी 38 जिलों के सभी ग्राम पंचायतों में सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस लक्ष्य के अंतर्गत डेढ़ करोड़ काष्ठ पौधे और 50 लाख फलदार पौधे लगाए जायेंगे।
इस योजना के तहत सड़कों के किनारे, तालाबों के किनारे और निजी भूमि पर वृक्षारोपण पर ज्यादा से ज्यादा फोकस किया जाएगा, वित्तीय वर्ष 2021-22 में पौधारोपण हेतु अब तक 30 हजार 586 योजनाएं तैयार हैं जिनमें निजी योजनाएं 16 हजार 852, सड़क के किनारे 830 योजनाएं, जल संरचनाओं के किनारे 1648 योजनाएं और अन्य 1856 योजना शामिल हैं।
बिहार का हरित आवरण
बिहार में फिलहाल हरित आवरण का प्रतिशत 15 है जिसे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने सभी विभागों को 17% तक ले जाने का लक्ष्य दिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग ने निजी जमीन पर अधिक-से-अधिक पौधे लगाने के लिए सुविधाओं का एलान किया है। आम, लीची, जामुन, कटहल, आंवला, बेल, नींबू, अमरूद आदि के 200 पौधे लगवाने वाले परिवार को एक इकाई माना जायेगा।
अगर कोई एक परिवार के पास 200 पौधे के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है तो ऐसी स्थिति में दो दिन परिवार मिलकर एक इकाई को पूरा कर सकते है और इस प्रकार छोटे किसानों को भी इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

मिलेगी मजदूरी
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ” वृक्षारोपण के इस योजना के लिए हर इकाई की देखरेख के लिए अगले पांच वर्ष तक हर महीने आठ मानव दिवस की मजदूरी मनरेगा योजना के तहत दी जायेगी साथ ही हर इकाई पर एक चापाकल भी स्थापित किया जायेगा।

