बिहार का पहला रिवर और जंगल सफारी एक साथ, जानिए किराया और कब होगा शुरू, डेडलाइन तय

Bihar First River And Jungle Safari

दुर्गावती जलाशय परियोजना में वन एवं पर्यावरण विभाग के साथ पर्यटन विभाग ने जुलाई महीनें से जो रिवर सफारी शुरू करने का निर्णय लिया है। वह बिहार का पहला ऐसा सफारी होगा जिसमें जंगल और नदी दोनों के मजे साथ-साथ लिए जा सकते हैं।

जलाशय के दायें तट पर मौजूद रोहतास और बायें तट पर मौजूद कैमूर इलाके में तैयार किए गए प्वाइंट से रिवर सफारी के लिए 25 सीटर वोट निकलेगी जो नदी के अंदर गुप्ता धाम की ओर छह किलोमीटर तक जाएगी। जहां उतरकर पर्यटक वन क्षेत्र में घुमने का आनंद लेंगे।

इस तरह की सफारी बिहार में पहली बार

उसके बाद वापस लौटेंगे। इस तरह की सफारी बिहार में पहली बार शुरू हो रही है। जो रोमांच और उत्साह से भरी हुई होगी। डीएफओ प्रदुम्न गौरव ने बताया कि जुलाई से पहले सप्ताह से शुरू होने वाली इस सफारी की सारी तैयारी पूरी हो चुकी है।

राज्य सरकार के तरफ से तय मानक के किराए का निर्देश भी आ चुका है। जो समय की डेडलाइन तय की गई है। उसी दिन से विधिवत इसका उद्घाटन होगा।

It will be the first such safari of Bihar in which the fun of both the forest and the river will come together.

फिर दिन भर में कई फेरे लगाकर यह वोट वापस परियोजना के प्वाइंट पर आकर शाम में खड़ी हो जाएगी। डीएफओ ने बताया कि इसके लिए वोट चालकों और सुरक्षा प्रबंधन में दक्ष तकनशियन भी आ रहे हैं।

बाल्मिकी नगर में है ऐसी सफारी, पर वन क्षेत्र से बाहर

बिहार में इससे पहले गंडक नदी पर बाल्मिकी नगर में रिवर सफारी का पर्यटक आनंद ले रहे थे। परंतु नदी में वोट पर सवार होकर आगे जाने पर पर्यटकाें को सघन वन क्षेत्र के इलाके में घुमने से वंचित होना पड़ता था।

क्योंकि वह सफारी का नदी से बाहर का इलाका वन क्षेत्र से दूर था। जिसके वजह से बाल्मिकी नगर के इस सफारी में दर्शक सिर्फ नदी या जलाशय का आनंद ले पाते थे।

A view of Durgavati Reservoir

डीएफओ ने बताया कि दुर्गावती जलाशय का यह सफारी अपने आप में अलग है। जहां डबल हल्क का पचास सीटर वोट उपयोग किया जाएगा।

मात्र पचास रुपया होगा किराया

राज्य सरकार ने इस सफारी के लिए पर्यटकों हेतु जो किराया तय किया है वह मात्र पचास रूपए का है। जिसे भुगतान करने के बाद पर्यटक वोट में सवार होकर छह किलोमीटर अंदर जंगल के प्वाइंट तक जाएगा।

वहां उन पर्यटकों को उतारकर वोट पहले से मौजूद लौटने वाले पर्यटकां को लेकर आएगी। फिर जलाशय के प्वाइंट से पर्यटकों को लेकर उस प्वाइंट पर जाएगी। इस तरह वोट को कई फेरे लगाने पड़ेंगे।

जो 25 व्यक्ति को लेकर आने जाने का चक्र होगा। इस दौरान जो पर्यटक सड़क के रास्ते लौटना चाहेगें। उनके लिए भी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।