बिहार की बहू अंजू रंजन ने साउथ अफ्रीका में गांधी मार्च का किया नेतृत्व, बढ़ाया देश का मान
बिहार की रहने वाली और भारतीय विदेश सेवा में एक वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा दे रही अंजु रंजन ने अपने काम से राज्य एवं देश का नाम रोशन किया है। अंजु मूल रूप से झारखण्ड ही रहने वाली है और बिहार में नालंदा जिले की बहु है, हिलसा अनुमंडल के एकंगरसराय प्रखंड के अतरामचक में उनकी ससुराल है और उनके पति रंजन कुमार लखनऊ में कमिश्नर हैं।
अंजु ने पिछले दिनों आजादी के अमृत महोत्सव के तहत दक्षिण अफ्रीका में आयोजित दो दिवसीय गांधी यात्रा का नेतृत्व कर पूरे विश्व को शांति व अहिंसा का संदेश दिया है। वह फिलहाल भारत के कान्सल जनरल (महावाणिज्य दूत) के पद पर जोहान्सबर्ग में पदस्थापित हैं। वह इससे पहले भी कई मौकों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
यह था मुख्य उदेश्य
दक्षिण अफ्रीका में आयोजित इस गांधी यात्रा का मुख्य उदेश्य वहां के नागरिकों को मौजूद गांधी जी के विरासत स्थलों के बारे में जानकारी देना था, अंजु ने इस 75 लोगों के समूह के दो दिवसीय दौरे का नेतृत्व किया।
इस कार्यक्रम में शामिल सभी लोग पीटरमाटि्जवर्ग, फिनिक्स फॉर्म, टॉलस्टॉय फॉर्म, लेडीस्मिथ, डंडी और वोल्करस्ट सहित ऐसे 10 स्थानों पर गए जिनका संबंध राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से रहा।
पीटरमाटि्जवर्ग में ही वह रेलवे स्टेशन है, जहां महात्मा गांधी को पहली श्रेणी में यात्रा करने से वंचित करते हुए ट्रेन से नीचे उतार दिया गया था। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में दो आश्रमों की स्थापना की थी, जिनके नाम फिनिक्स फॉर्म और लियो टॉलस्टॉय फॉर्म है।
दोनों आश्रमों की स्थापना महात्मा गांधी ने समाज सुधार के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए की थी। फिनिक्स फॉर्म में अभी गांधी जी की पोती इला गांधी रहती हैं।
एक मीडिया चैनल से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि यह यात्रा जोहान्सबर्ग में एक सप्ताह तक चलने वाले उत्सव में से एक थी। ‘संगीत संध्या’ में गांधी के पसंदीदा भजन पेश किए गए और श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मेकिग ऑफ द महात्मा’ की विशेष स्क्रीनिग की गयी।
हिंदी से है लगाव
आपको बता दे कि अंजु रंजन 2002 बैच की अधिकारी है, हिदी साहित्य में रूचि होने के कारण उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में हिदी साहित्य को मुख्य विषय के रूप में लिया था। और अभी भी हिंदी भाषा के विकास और इसके प्रचार प्रसार को लेकर खूब काम करती रहती है।
अंजु रंजन की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कविता संग्रह ‘ प्रेम के विभिन्न रंग’ व ‘ विस्थापन और यादें’ पसंद की गई हैं। बाल्य- काल का संस्मरण ‘ वो कागज़ की कश्ती’ इन दिनों चर्चा में है। इनकी ‘कोरोना डायरी’ को हाल में ही नयी धारा रचना सम्मान मिला है।

