बाबाधाम का पेड़ा लोकल से हुआ ग्लोबल, 20 दिनों तक नहीं होता ख़राब, ये है खासियत

Babadham peda became global from local

वैसे तो तमाम धार्मिक स्थलों का जायका विशेष होता है, लेकिन बाबाधाम में प्रसाद के रूप में मिलने वाले पेड़े की बात ही अलग है। झारखंड का श्रावणी मेला विश्वप्रसिद्ध है।

इस दौरान देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर में बाबा को अभिषेक के बाद मिलने वाला प्रसाद रूपी पेड़ा भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

babadham deoghar
देवघर का बाबा बैद्यनाथ मंदिर

स्वाद की बात की जाए तो देश-विदेश में ऐसे पेड़े कहीं नहीं मिलते और जब इसे प्रसाद के रूप में लोग खरीदते हैं तो इसका स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। आपको बता दें कि कुछ महीने पहले ही देवघर के पेड़ों को इंटरनेशनल मार्केट में इसे बेचने का लाइसेंस मिल चुका है।

babadham ka prasad
बाबाधाम का पेड़ा भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

अब यहां का मशहूर और स्वादिष्ट पेड़ा बहरीन-कुवैत जैसे खाड़ी देशों के लोगों को भी अपना दीवाना बना रहा है। इसे जीआई (ज्योग्राफिल इंडिकेशन) टैग दिलाने के लिए दावेदारी भी पेश की गयी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इसकी विशिष्ट पहचान को मान्यता मिल जायेगी।

प्रसिद्ध है देवघर का पेड़ा गली

देवघार बाबा मंदिर के पास एक पेड़ा गली है। जो देशभर में प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु पेड़ा गली में जाकर ही पेड़ा खरीदना पसंद करते हैं।

Peda Gali of Deoghar is famous
प्रसिद्ध है देवघर का पेड़ा गली

अन्य जगहों की तुलना में पेड़ा गली और बासुकीनाथ के घोरमारा में मिलने वाला पेड़ों का स्वाग अन्य जगहों की तुलना में काफी पसंद किया जाता है।

दस हजार टन पेड़ों के कारोबार की संभावना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शंकर के कुल 24 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा वैद्यनाथ का धाम देवघर है। जहां हर साल तकरीबन दो से ढाई करोड़ श्रद्धालु-सैलानी पहुंचते हैं।

यहां महीने भर चलनेवाला श्रावणी मेला इस बार आगामी जुलाई से शुरू हो रहा है, जिसमें करीब 80 लाख से एक करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

deoghar ka prasad
देवघर का प्रसाद

बाबाधाम पेड़ा ट्रेडर्स एसोसिएशन (बीपीटीए) के एक सदस्य बताते हैं कि श्रावणी मेले के दौरान लगभग दस हजार टन पेड़े का कारोबार होने की संभावना है।

देवघर के पेड़ों की कीमत

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देवघर के पेड़ों की कीमत
  • पेड़ा : 800 ग्राम खोवा एवं 200 ग्राम चीनी – 650 रुपये प्रति किलोग्राम.
  • पेड़ा : 700 ग्राम खोवा एवं 300 ग्राम चीनी – 350 रुपये प्रति किलोग्राम

शुद्ध खोए और गुड़ से बनता है यह पेड़ा

देवघर-बासुकीनाथ मुख्य मार्ग पर स्थित घोरमारा अपने विशेष पेड़े के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इस पेड़े की खासियत है कि कम से कम 20 दिनों तक बगैर रेफ्रिजरेशन के भी रखा जा सकता है।

babadham peda
शुद्ध खोए और गुड़ से बनता है यह पेड़ा

शुद्ध खोए से निर्मित इस प्रसाद को गुड़ के साथ मिलाकर बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए कारीगर को भट्ठी की गर्म ताप के सामने खड़े रहकर घंटो की मेहनत करनी पड़ती है। इसकी खुशबू बाबाधाम आने वाले तमाम कांवरियो को अपनी ओर खींच लेता है।

लाखों लोगों को मिलता है रोजगार

सावन के मेले में पूरा देवघर और बासुकीनाथ पेड़ों की दुकानों से पटा होता है। वैसे यहां सालों भर पेड़ा मिलता है लेेकिन सावन में इसकी डिमांड बढ़ जाती है। इससे यहां लाखों लोगों को रोजगार तो मिलता ही है साथ ही यह देवघर की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Peda also plays an important role in the economy of Deoghar.
देवघर की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है पेड़ा

यहां पर केसरिया पेड़ा, मालई वाला पेड़ा और कड़े पाग वाला सहित विभिन्न प्रकार के पेड़ों के प्रकार मिल जाएंगे। इनकी कीमत 350 से 600 रुपए तक होती है।

बाबाधाम के पेड़ों का स्वाद विदेशियों की जुबां पर भी चढ़ा 

बाबा को प्रसाद के रूम में चढ़ाया जानेवाला पेड़ा अब विदेशी पर्यटकों के मन को भी भा रहा है। ऐसे में इस पेड़े की डिमांड तेजी से बढ़ती जा रही। बाबाधाम के पेड़ा विदेश में भी अपनी धाक जमा रहा है।

अब विदेशी मार्केट में पेड़े की सप्लाई करने की तैयारी की जा रही है। दरअसल बाबाधाम पेड़ा और अन्य उत्पादों को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में प्रमोट करने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं।