ISRO में साइंटिस्ट बना बिहार का लाल, कई हजार प्रतिभागियों में आशुतोष को मिला 22वां रैंक
बिहार के एक छोटे से गांव से निकलर अपने मेहनत और संघर्ष के बदौलत पूर्णिया के बेटे आशुतोष कुमार ने इसरो (ISRO) के साइंटिस्ट तक का सफर तय किया है, आशुतोष ने पूर्णिया और बिहार का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता से पूरे परिवार में हर्ष है।
हज़ारों बच्चों में मिला 22वां स्थान
बता दे कि आशुतोष को ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर चयनित किया गया है, साल 2019 में ISRO में मैकेनिकल साइंटिस्ट पद के लिए विज्ञापन निकला था जिसके बाद देश के करीब 70 हजार प्रतिभागियों ने 2020 में एग्जाम दिया था।
करीब 1 हज़ार चयनित प्रतिभागियों में बिहार के आशुतोष भी शामिल है जिनको 22वां रैंक मिला है। आशुतोष ने बताया कि जॉइनिंग नवंबर तक होगी और उसके बाद विभाग काम का निर्धारण करेगी।
गांव में हुई शुरुआती पढ़ाई
बिहार के पूर्णिया जिले के चुनापुर निवासी पेशे से अधिवक्ता विनय प्रकाश झा के पुत्र आशुतोष कुमार की शुरूआती पढ़ाई पूर्णिया थाना चौक स्थित सरस्वती विधा मंदिर से हुई जिसके बाद उन्होंने जिला स्कूल से +2 पास किया।
इंजीनियरिंग के लिए आशुतोष ने ओडिशा के KIIT यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और वहां से B.Tech कर आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया। बचपन से ही आशुतोष को विज्ञानं में काफी लगाव था और वो एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानते हैं।
पूरे परिवार को सफलता का श्रेय
आशुतोष अपने इस सफलता का श्रेय पूरे परिवार को देते है, उन्होंने बताया कि पिता के अलावा मां मनी देवी, बहन राखी कुमारी और मामा शंभूनाथ झा ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। परिवार के लोगों के सहयोग के बिना यह सफलता नहीं मिलती।
क्रिकेट में है रूचि
अपने खली वक्त में आशुतोष को क्रिकेट खेलना काफी पसंद है, उनके पिता बताते है कि स्कूल के दिनों से ही छुट्टी होने के बाद वह थोड़ी देर के लिए क्रिकेट खेल लेता था। स्वभाव से वह काफी शांत और नम्र है। मोबाइल, फिल्म, टीवी इन चीज़ों से ज्यादा लगाव नहीं है आशुतोष का।

