बिहार: घर चलाने के लिए पिता चलाते है ऑटो, बेटे का हुआ बिहार पुलिस दारोगा में चयन
कहते हैं कि सच्ची लगन एवं मेहनत के बूते किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, मन में अगर कुछ कर गुजरने की चाह हो तो बड़े से बड़े मुकाम को हासिल किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही चरितार्थ किया है बिहार में एक ऑटो चालक के बेटे ने। बिहार पुलिस में दारोगा की परीक्षा में सफल होकर ऑटो ड्राइवर के बेटे विवेक ने न केवल सफलता हासिल की है बल्कि अपने पिता का सिर भी फख्र के साथ ऊंचा कराया है।
बिहार पुलिस में दरोगा बने विवेक
बिहार के जहानाबाद जिले के एक सुदूरवर्ती गांव नोआवा के ऑटो चालक के बेटे विवेक ने कुछ ऐसा किया जिससे आज पूरा गांव उनपर फक्र कर रहा है। जल्द ही गांव के इस लाल के सिर पर टोपी, कमर में सरकारी रिवॉल्वर और कंधे पर चमचाते हुए दो सितारे होंगे। अपनी लगन और अथक प्रयास के बूते, विवेक बिहार पुलिस में दारोगा बन गए हैं।
पिता चलाते है ऑटो
विवेक के पिता का नाम सच्चिदानंद शर्मा है, वे पिछले 25 सालों से ऑटो रिक्शा चला रहे हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है। अपने बेटे के सफलता से वे काफी खुश है और इसे उसकी मेहनत का ही प्रतिफल बता रहे हैं। विवेक की मां दो गृहणी हैं उनका गला बोलते-बोलते गला रूंध जाता है।
सफलता के बाद विवेक बताते है कि हमारी परवरिश अच्छी हो इसके लिए पिता ने जी जान से मेहनत की. बच्चों की खातिर उन्होंने जीवन में कई बलिदान किए और घर चलाने के लिए ऑटो चलाया। ऐसे में उनकी शुरुआत से ही यह ख्वाहिश थी कि कुछ ऐसा करूं जिससे हर कोई उनके पिता को सम्मान भरी नजरों से देखे।
कुल 2213 उम्मीदवारों का चयन
आपको बता दें कि यह भर्ती परीक्षा बिहार पुलिस में एसआई के 1998 और सार्जेंट के 215 पोस्ट के लिए थी, फाइनल रिजल्ट के बाद एसआई पद के लिए 1998 कैंडिडेट्स और सार्जेंट पदों के लिए 215 उम्मीदवारों का सिलेक्शन हुआ है। सिलेक्ट किए गए कैंडिडेट्स में 1256 पुरुष और 742 महिलाएं हैं. वहीं सार्जेंट पद के लिए 131 पुरुष व 84 महिला शामिल हैं।

