जब युवा दिलीप कुमार पहुंचे थे मुंगेर के पीरपहाड़ी, देखने के लिए जमा हो गई थी हज़ारों की भीड़
कहने वाले कहते है वो एक अभिनेता नहीं बल्कि एक पूरा इंस्टीटूशन था, बीते दिन बुधवार को बॉलीवुड ने दिलीप कुमार के रूप में अपना एक रत्न खो दिया, उनके जाने से प्रशंसकों और करीबियों को झटका लगा है। सिनेमा के स्तम्भ कहे जाने वाले दिलीप साहब भले ही हमसब को छोड़कर चले गए हो लेकिन हम सभी के दिलों पर वह सदियों तक राज करते रहेंगे।
दिलीप कुमार साहब के इर्दगिर्द घूमती हज़ारों किस्सकों कहानियों के बीच आज हम दिलीप कुमार के बिहार कनेक्शन की कहानी जानेंगे कि आखिर कैसे नरगिस से पता लेकर दिलीप कुमार अपने एक फिल्म की शूटिंग के लिए बिहार के मुंगेर पहुंचते है और वहां उन्हें देखने के लिए हज़ारों की संख्या में भीड़ उमर आती है।

साल 1966 का था, मुंगेर के पीर पहाड़ी पर दिलीप साहब अपनी एक फिल्म की शूटिंग के लिए पहुंचे थे। फिल्म की शूटिंग डेढ़ दिन तक चली और इस दौरान आसपास के सैकड़ों और हज़ारों लोग उनकी शूटिंग को देखने के लिए पीर पहाड़ी पहुंच चुके थे और दो दिनों के लिए लोग बिना घर गए पीर पहाड़ के आसपास समय का गुजारा किया और अपने पसंदीदा अभिनेता के फिल्म की शूटिंग का आनंद उठाया।
राजा के महल में हुई थी शूटिंग
उस वक्त फिल्म जिस जगह शूट हुई थी वहां राजा का महल है, महल भले ही आज एक खँडहर में तब्दील हो गई है लेकिन उसकी ख्याति आज भी दूर-दूर तक फैली है। राजा के इस महल में 58 द्वार और 52 कोठी हुआ करता था। फिल्म की शूटिंग के वक्त फिल्म का नाम भी तय नहीं था, दिलीप साहब मुख्य अभिनेता की भूमिका में थे, महल के तीनों तरफ कैमरे लगे हुए थे। अभिनेता और अभिनेत्री में झगड़े की सीन को फिल्माया गया था।
फिल्म में एक सीन आता है जब अभिनेत्री पीर पहाड़ी से गंगा में कूद जाती है, पहाड़ से गंगा में कूदने वाले सीन में अभिनेत्री की जगह एक लड़की के पुतले कपड़ा पहनाकर लटका दिया जाता है। लोगों को फिल्म की शूटिंग देखने में बहुत आनंद आया था।
कैसे मिला था पता
जानकार बताते हैं कि मशहूर फिल्म अभिनेत्री स्व. नरगिस दत्त मां जद्दनबाई मुंगेर में नृत्य सिखातीं थी। मुंगेर के राज घरानों में नृत्य-संगीत कार्यक्रम में भाग लेती थीं। पीर पहाड़ी के उस महल में भी आना-जाना लगा रहता था। 1934 के भूकंप से पहले वह मुंगेर छोड़कर पश्चिम बंगाल चली गईं। इस ऐतिहासिक धरती के बारे में नरगिस को बताया। नरगिस ने इस मुंगेर के बारे में दिलीप साहब को जानकारी दी थी। इसके बाद दिलीप साहब को इस शहर में किसी भी फिल्म की शूटिंग करने के बारे में काफी उत्साहित थे।


