तरक्की की राह में बिहार फिर से फिर फिसिड्डी, नीति आयोग के SDG रैंकिंग में यह राज्य है टॉप पर

गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया के थिंक टैंक नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्यों के लिए सूचकांक (एसडीजी) भारत सूचकांक 2020-21 की रिपोर्ट जारी कर दी है।  सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति के मूल्यांकन के इस रिपोर्ट में बिहार सबसे निचले पायदान पर रहा।

Sustainable Development Goals नाम की इस रिपोर्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिति पर प्रदर्शन का आकलन किया जाता है, गुरुवार को दिल्ली में ही नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इस रिपोर्ट को लॉन्च किया।

लांच के दौरान उन्होंने कहा कि एसडीजी इंडिया इंडेक्स और डैशबोर्ड के माध्यम से एसडीजी की निगरानी के हमारे प्रयास को दुनिया में पहचान मिल रही है और इस डेटा का उपयोग विकास के प्रोजेक्ट पर किया जा रहा है।

फिर से फिसड्डी रहा बिहार

नीति आयोग द्वारा जारी किए गए एसडीजी इंडिया इंडेक्‍स एंड डेशबोर्ड 2020-21 के तीसरे संस्करण में भी बिहार फिर से फिसड्डी रहा है जबकि केरल पहले स्‍थान पर है। रैंकिंग इस यह स्पष्ट होता है कि बिहार निर्धारित मानको पर बेहद ही ख़राब प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में केरल को सर्वाधिक 75 अंक मिले हैं तो सबसे निचले पायदान पर बिहार को 52 अंक। रिपोर्ट के पिछले अंक में बिहार को 50 अंक मिले थे।

टॉप पांच राज्य 

  • केरल – 75 अंक
  • हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु – 74 अंक
  • आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, उत्तराखंड – 72 अंक
  • सिक्किम – 71 अंक
  • महाराष्ट्र – 70 अंक

आखरी पांच राज्य

  • छत्तीसगढ़, नागालैंड, ओडिशा – 61 अंक
  • अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, राजस्थान, उत्तर प्रदेश – 60 अंक
  • असम – 57 अंक
  • झारखंड – 56 अंक
  • बिहार – 52 अंक

बिहार को मिले विशेष राज्य का दर्जा

हर बार की तरह इस बार भी बिहार सरकार को विपक्षी पार्टियों ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए घेरा, रिपोर्ट आने से बिहार की राजनीति एक बार फिर से गरमाहट आ गई है। दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी जदयू ने इसको लेकर राज्‍य को विशेष दर्जा देने की मांग की है, उनका कहना है कि बिहार को जबतक विशेष दर्जा नहीं मिल जाता तब तक इसे दूसरे विकसित राज्‍यों की श्रेणी मे लाना मुश्किल है।