बिहार में बसों से सफर करना हुआ 40 फीसदी तक महंगा, डीजल की बढ़ती कीमत ने बिगाड़ा खेल
”सर, कितना लीटर दे? अरे… लीटर क्या देखना है, टंकी फुल कर दो….” बिहार के के पेट्रोल पंप पर यह वार्तालाप सुना जानेवाला संवाद अब बीते दिनों की बात हो गयी है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि ने पेट्रोल पंप कर्मी और ग्राहकों के बीच के संवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब पंपों पर पेट्रोल लेने के लिए आनेवाले ग्राहक जरूरत और अपनी जेब के हिसाब से सीमित मात्रा में पेट्रोल ले रहे हैं।
पेट्रोल और डीजल के शतक से लोगों की सिमटी आमदनी
पेट्रोल का दाम पिछले कुछ महीनों से बढ़ते-बढ़ते अब 117 रुपये 22 पैसे तक पहुंच गया है। वहीं, डीजल का मूल्य भी शतक लगा चुका है।
वही, प्रीमियम पेट्रोल का मूल्य 121 रुपया 23 पैसे प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वैसे पेट्रोल के पीछे चल कर डीजल का दाम 101 रुपए तक आ गया है।

आलम यह है कि व्यवसायी समेत हर तबके के लोग अपनी सिमटी आमदनी के बीच पेट्रोल और डीजल की महंगाई का अतिरिक्त आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। निजी गाड़ी मालिक तो परेशान हैं ही, सार्वजनिक क्षेत्र के वाहन मालिकों की स्थिति और भी खराब हो गयी है।
अब कम दिखते हैं टंकी फुल करानेवाले ग्राहक
पेट्रोल पंप मालिकों के मुताबिक, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण व्यवसाय को 18 से 20 फीसदी तक नुकसान हुआ है। पेट्रोल पंप संचालक चंदन बताते हैं कि अब तो कार और बाइक में टंकी फुल करने के लिए कहनेवाले ग्राहक कम ही दिखते हैं। अब हर कोई पेट्रोल भराने से पहले अपनी जेब टटोलता है। उसके बाद बजट के हिसाब से तेल खरीदता है।
बस से सफर करना महंगा स्कूल वैन का भी बढ़ा किराया
बसों से सफर करना महंगा साबित होने लगा है। निजी बसों सहित स्कूल के वैन का किराया बढ़ गया है। डीजल के बढ़े दाम का सबसे अधिक असर परिवहन पर पड़ रहा है।
सभी छोटे वाहनों के किराये प्रति किलोमीटर डेढ़ से दो रुपये हो गए हैं। मधेपुरा से पूर्णिया के किराये में 33 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हो गयी है।

पहले पूर्णिया का भाड़ा 120 रुपया था, अब बढ़ कर 160 हो गया है। भागलपुर का किराया 130 रुपये से बढ़ कर 180 रुपये हो गया है। मधेपुरा से सहरसा पहले 20 रुपये था, जो अब 50 रुपए हो गया है।
वहीं, सुपौल जाने के लिए लोगों को पहले 50 रुपये देना पड़ता था। वहीं, अब 70 रुपये देना पड़ रहा है. मधेपुरा से पटना के लिए 350 रुपये देने पड़ रहे थे, लेकिन अब 400 रुपये देना पड़ रहा है।
डीजल की बढ़ती कीमत ने बिगाड़ा खेती का गणित
जिले के किसानों की की हालत भी अच्छी नहीं है। मक्के की फसल की कीमत नहीं मिल पा रही है। कभी बाढ़ तो कभी सूखा किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरता रहा है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती का काम शुरू है। डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि ने धान की खेती का गणित ही बिगाड़ दिया है।

हालत यह है कि एक एकड़ खेती पर खर्च होनेवाली राशि में वृद्धि होना निश्चित है। खेत की जुताई से होकर खाद बीज की भी कीमत बढ़ गयी है।
उसके साथ प्रति कट्ठा एक फेरा खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर का किराया 30 रुपया तक बढ़ गया है। पेट्रोल की कीमतों में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
मालवाहक वाहनों के किराए 30 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इसके चलते खाद-बीज व कीटनाशक की कीमतों में 35 फीसदी तक इजाफा हुआ है।

