कड़कनाथ मुर्गे ने बदली किस्मत, कमा रहे सालाना 5 लाख रुपये, दूसरे राज्य से लोग आ रहे बारीकियां सिखने

kadaknath changed his luck earning rs 5 lakh annually

कहा जाता हैं कि दिल में कुछ करने की तमन्ना हो तो सफलता आपके कदम चूमती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है खगड़िया के अलौली प्रखंड स्थित पररी गांव निवासी रंजय पासवान ने। आपको बता दे की वो अनपढ़ हैं।

इसलिए जहां भी काम की तलाश में जाते, उन्हें मजदूरी करने का काम मिलता। रंजय मजदूरी नहीं करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने कड़कनाथ मुर्गी पालन की योजना बनाई।

Kadaknath chicken changed luck
कड़कनाथ मुर्गे ने बदली किस्मत

इसके लिए उन्होंने ट्रेनिंग लेकर काम शुरू कर दिया। आज वो इसमें इतना सफल हो गए हैं कि अब सालाना 5 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। वहीं, दूसरे राज्य के लोग भी उनसे कड़कनाथ मुर्गी पालन की बारीकियां सीखने आते हैं।

मजदूरी से परिवार को चलाना था मुश्किल

रंजय पासवान बताते हैं कि ‘वो अनपढ़ हैं, जिसके कारण उनको हर जगह मजदूरी का काम मिलता था।’ रंजय बिहार के बाहर जाकर मजदूरी किया करते थे। लेकिन इस कमाई से उनका परिवार नहीं चल रहा था।

ऐसे में उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और वापस घर आ गए। यहां रंजय ने लोगों से संपर्क करना शुरू किया। जहां उन्हें कड़कनाथ मुर्गी पालन की सलाह मिली।

Kadaknath chicken farming is a profitable business
कड़कनाथ मुर्गे की फार्मिंग एक फायदेमंद कारोबार है

रंजय ने बिना समय बर्बाद किए खगड़िया कृषि केंद्र के वैज्ञानिक से संपर्क किया और ट्रेनिंग शुरू कर दी।

कई राज्यों से आते हैं लोग

रंजय ने खगड़िया कृषि केंद्र से उन्होंने 125 रुपए प्रति चूजा के हिसाब से 100 चूजा खरीदा और पालन शुरू किया। 4 माह में चूजे 1 से डेढ़ किलो के हो गए।

रंजय ने इन्हें 1000 रुपए किलो के हिसाब से बेचा और आज वो एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। अंडा प्रति पीस 60-75 रुपए के हिसाब से बेचते हैं।

Ranjay sells Kadaknath eggs at Rs 60-75 per piece
रंजय 60-75 रुपए प्रति पीस के हिसाब से बेचते हैं कड़कनाथ के अंडे

रंजय बताते हैं कि कड़कनाथ मुर्गी और उसके अंडे वो स्थानीय लोगों को भी बेचते हैं। साथ ही आंध्र प्रदेश, ओडिशा, यूपी और झारखंड के व्यापारी भी इनसे खरीदारी करने आते हैं। रंजय कई जगह सम्मानित भी हो चुके हैं।

एक वर्ष पहले पहले शुरू किया टर्की पालन

रंजय ने बताया कि ‘वैसे तो उनके पास कई नस्ल के मुर्गे-मुर्गियां हैं। लेकिन सबसे फायदेमंद उनके लिए कड़कनाथ नस्ल की मुर्गी और मुर्गे रहे।

Ranjay bought 100 chicks from Khagaria Agricultural Center at the rate of Rs 125 per chick and started rearing
रंजय ने खगड़िया कृषि केंद्र से उन्होंने 125 रुपए प्रति चूजा के हिसाब से 100 चूजा खरीदा और पालन शुरू किया था

उन्होंने बताया कि अभी एक साल पहले वे अफ्रीकी नस्ल के टर्की भी लाए हैं। इसकी डिमांड भी धीरे धीरे बाजार में बढ़ रही है। मुर्गियों के अलावा उनके पास 1 किलो से 8 किलो के टर्की और उसके अंडे भी मौजूद हैं।’