चिलम दिया लहराई हो…से छा गयीं कुढ़नी की इंदु, वीडियो वायरल, बेहद मार्मिक है इनकी कहानी

एक व्यक्ति गांजा पीके चिलम दिया लहराई हो., अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव है तो ये लाइन आपने अब तक को किसी न किसी तरीके से सुन ही लिया होगा। बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की समाज सुधार अभियान यात्रा के दौरान मुजफ्फरपुर में लोक गायिका इंदु देवी ने जो गीत प्रस्तुत किया वह इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

पूरे देश में हो रही चर्चा

इस गीत के वायरल होने के बाद लोक गायिका इंदु देवी की चर्चा बिहार के साथ ही पूरे देशभर में शुरू हो गई है, नशे की लत को गलत बताने के सन्देश से भरा यह गीत लोगों को खूब पसंद भी आ रहा है। ऐसे में आज हम इस गीत को गाने वाली इन्दु देवी के बारे में जाएंगे और उनके अब तक के सफर पर एक नजर डालेंगे।

चिलम दिया लहराई लिरिक्स

इन्दु देवी की कहानी को बताने से पहले आपको एक बार फिर से इस गीत के लिरिक्स से परिचय करा देते है, इस गीत के बोल थे एक गंजेड़ी गांजा पीके चिलम दिया लहराई हो…चिलम दिया लहराई…चिलम में से तितकी उड़ के हो..जर गइल तोसक रजाई, नसबा नरक में ले जाई, जनी पीअह हे भाई़…

जीविका समूह की सदस्य

इस गीत के माध्यम से पॉपुलर हो रही इंदु देवी बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी के सकरी सरैया की रहने वाली है, इंदु पिछले दो सालों से जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं और कई मौकों पर इस तरह के लोकगीतों को प्रस्तुत भी कर चुकी है।

खुद गाने को लिखती है और उसे गाती है

इंदु देवी बताती है की उन्होंने कभी गायन का प्रशिक्षण नहीं लिया और ना ही स्कूली शिक्षा ही प्राप्त की। गांव में साक्षरता अभियान के तहत उसने हिन्दी पढ़न और लिखना सीखा। इंदु निरंकारी सत्संग से जुड़ी हैं वह भजन भी गाती है।

इंदू खुद गाने को लिखती है और उसे गाती है। 2007 में बिहार सरकार के शिक्षा परियोजना से वे जुड़ी थी जिसके बाद से सरकारी कार्यक्रम में गीतों की प्रस्तुति के लिए उन्हें बुलाया जाने लगा।

चिलम दिया लहराई 30 साल पुराना गीत

एक वीडियो इंटरव्यू में मीडिया से बातचीत करते हुए इंदु देवी ने बताया कि चिलम वाला गीत उसने 30 साल पहले कही सुना था उसे यह गीत अच्छा लगा तो उसे अच्छी तरह से याद कर लिया। अब वह इस गीत को सरकार के नशामुक्ति अभियान में गा रही है।

इंदु देवी के पति पति पेशे से दर्जी हैं जो 16 साल से बीमार हैं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गयी जिसके बाद वह दूसरों के घरों में चौका बर्तन करने लगी और साथ ही दूसरों के खेतों में मजदूरी कर अपने तीन बच्चों को किसी तरह तालिम दी।

समय से पहले पिता को खोया

किसी तरह से वह अपने एक बेटी की शादी की है, परिवार में चार लोगों के भरण पोषण की जिम्मेदारी उस पर है। अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत वह परिवार चला रही है। इंदु के पिता शुरू से ही काफी नशा करते थे और इसी वजह से उनके पिता का समय से पहले निधन हो गया, पिता को इस तरह से खोने के बाद वह नशे के खिलाफ हो गयी और आज समाज को नशामुक्ति का सन्देश दे रही है।

देखिए वीडियो इंटरव्यू