बिहार के चिल्ड्रन फ्रेंडली कोर्ट रूम कांसेप्ट में दूसरे राज्य ले रहे दिलचस्पी, जानिए खासियत
बिहार में बनाए गए चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट रूम के कांसेप्ट में अब दूसरे राज्य भी दिलचस्पी ले रहे है, बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जहां सभी जिलों में ऐसे कोर्ट रूम हैं, जो किसी अपराध का शिकार बने बच्चों को पुलिस-अदालत के भय का सामना करने से बचाता है।
इस खास तरह के कोर्ट रूम में बच्चे अपराधी-आरोपित के सामने आए बगैर गवाही दे सकते हैं साथ ही बच्चों को वहां उन्हीं के अनुरुप माहौल मिल रहा है। वर्तमान में बिहार के 11 जिलों में इस तरह के दूसरे कोर्ट रूम भी बनाने की तैयारी चल रही है जहाँ बच्चों से संबंधित मामलों की संख्या 100 से अधिक है।
दूसरे राज्य ले रहे दिलचस्पी
चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट रूम का कांसेप्ट अब दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल बन गया है, दूसरे राज्य इसे लेकर जानकारी इकट्ठा कर रही है। चाइल्ड फ्रेंडली कोर्ट रूम की व्यवस्था इसलिए की गई कि वे कोर्ट में अपराधी को देखकर कहीं डर न जाएं। इसके तहत संबंधित जज के कक्ष से सटे एक कक्ष बनाया गया है।
बच्चों के हिसाब से किया गया है तैयार
यह कोर्ट रूम मूल रूप से 18 वर्ष की उम्र तक के उन बच्चों-किशोरों के लिए है, जो किसी अपराध की वजह से पीड़ित हैं, इस कोर्ट रूम में बच्चो की किताबें, खिलौने और कोर्ट की दीवारों पर बच्चों को आकर्षित करने वाली पेंटिंग की जाती है।
इस कोर्ट में बच्चे के साथ एक काउंसलर भी रहते हैं। जज माइक पर सवाल पूछते हैं और उसका जबाव काउंसलर के साथ बच्चा माइक पर देता है। बच्चे को जज के सामने भी नहीं लाया जाता है।

