बिहार के लाल ने महज 25 साल की उम्र में रचा इतिहास, कड़ी मेहनत कर अमेरिका के नामचीन कॉलेज में हुआ चयन
Bihari Boy created history at the age of just 25-प्रतिभाएं सुविधाओं और संसाधनों की मोहताज नहीं होतीं… साधारण परिवार में जन्मे किशनगंज के एक युवा अरिहंत ने कठिन परिस्थितियों में भी इतिहास रच दिया है. अरिहंत सुराणा का सेलेक्शन अमेरिका में एमडी इन इंटरनल मेडिसिन में हो गया है. अमेरिका के शीर्षस्थ 25 मेडिकल संस्थानों ने उसे इंटरव्यू में सफल घोषित किया है. किशनगंज जिले में इससे पहले किसी ने यह उपलब्धि प्राप्त नहीं की थी.

बिहार के सबसे कम साक्षर और संसाधनों की कमी वाले जिले किशनगंज के सामान्य परिवार के अरिहंत ने वो काम कर दिखाया है जो करोड़ों के डोनेशन देकर भी लोग नहीं कर पाते. दरअसल, अरिहंत को डॉक्टर बनने का जुनून सवार हो गया था, जिसे न सिर्फ उसने पूरा किया बल्कि उससे भी कई कदम आगे वो बढ़ गया. उसने अपनी मेहनत के बूते वो हासिल करके दिखाया है अधिकतर लोग जिसकी कल्पना तक नहीं कर पाते.

भारत के शीर्षस्थ रैंक प्राप्त कॉलेज में से एक नीलरतन सरकार मेडिकल कॉलेज, कोलकाता से वर्ष 2020 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद अरिहंत ने उससे भी कुछ बड़ा करने का मन बनाया. उसने कई परीक्षाओं और कई साक्षात्कार से गुजरते हुए यह मुकाम हासिल करने में सफलता प्राप्त की. उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति और काबिलियत से उसका चयन अमेरिका में एमडी इन इंटरनल मेडिसिन में हो गया. अमेरिका के शीर्षस्थ 25 मेडिकल संस्थानों ने उसे इंटरव्यू में सफल घोषित किया है.

अरिहंत इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाला किशनगंज जिले का पहला युवा छात्र है. साधारण परिवार और दुर्घटना के बाद की आर्थिक तंगी के वावजूद अरिहंत ने पिता के आशीर्वाद से अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है. पढ़ने में मेधावी अरिहंत ने 10वीं तक की शिक्षा बाल मंदिर में पूरी की और बेहतर अंक से दसवीं पास की. उनकी बहन भी इंजीनियर है. अब अरिहंत अमेरिका में अगले तीन सालों में एमडी इन इंटरनल मेडिसिन की पढ़ाई करेगा. अरिहंत की इस सफलता से उनकी वयोवृद्ध दादी विमला देवी, माता सुमन सुराणा, पिता अजय सुराणा फूले नहीं समा रहे.

अरिहंत के पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. लगातार उन्हें शुभचिंतकों से बधाइयां मिल रहीं हैं. अरिहंत की माता सुमन सुराणा का कहना है कि बेटे को डॉक्टर बनना हमारे बूते से बाहर था. हमारे पास न तो धन था और न ही संसाधन थे. अरिहंत हर एग्जाम में अच्छे रैंक प्राप्त करते गया और अपनी काबिलियत से यह मुकाम हासिल कर पाया.

अरिहंत के बचपन के स्कूल बालमंदिर के ट्रस्टी राज करण दफ्तरी ने बताया कि अरिहंत शुरू से ही मेधावी रहा है. हमेशा अनुशासन में रहने वाले अरिहंत से अन्य छात्रों को प्रेरणा लेनी चाहिए. उसने स्कूल के साथ जिले का नाम रोशन किया है.

