बिहार का अनोखा बिल्डिंग, केवल 5% बालू , ईट और सीमेंट का हुआ है इस्तेमाल, जानिए खासियत

katihar amazing house only 5 percent sand cement brick used

जी हां! बिलकुल बनाया जा सकता है और ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि कैलिफोर्निया से कटिहार लौटे शिक्षाविद रवि वर्मा खुद इस सोच को सच साबित कर रहे हैं।

दरअसल रवि वर्मा बिहार के कटिहार में एक ऐसे भव्य आलीशान बिल्डिंग का निर्माण करा रहे हैं जो कि 95 प्रतिशत बांस और 5 प्रतिशत ईट-बालू-सीमेंट के इस्तेमाल से बन रहा है।

House made using 95 percent bamboo and 5 percent brick-sand-cement in Katihar
कटिहार में 95 प्रतिशत बांस और 5 प्रतिशत ईट-बालू-सीमेंट के इस्तेमाल से बना घर

इस घर की सबसे खास बात यह है कि यह घर भूकंप रोधी होने के साथ-साथ क्लाइमेट फ्रेंडली भी है। इस तरीके से निर्मित भवन में खर्च भी 10 गुना कम पड़ता है।

दरअसल कैलिफोर्निया से कटिहार लौटे शिक्षाविद रवि बर्मा के द्वारा दलन गांव में इस घर में स्कूल खुलने वाला है। एक तरह से यह स्कूल का बिल्डिंग होगा, जो फिलहाल पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Educationist Ravi Burma returned from California to Katihar
कैलिफोर्निया से कटिहार लौटे शिक्षाविद रवि बर्मा

आपको बता दें, दुनिया के कई देशों से समय-समय पर भूकंप की त्रासदी सामने आने के बाद देश के महानगरों से सुदूर इलाके तक खासकर भूकंप जोन में रहने वाले लोग इस बात पर मंथन करने लगे हैं कि आने वाले दिनों में घर मकान, सरकारी कार्यालय या बच्चों के स्कूल का स्वरूप क्या होना चाहिए। ताकि ऐसी स्थिति में जान-माल का नुकसान कम से कम हो। ऐसे में बिहार के कटिहार जिले में एक ऐसा ही नायाब कंस्ट्रक्शन हो रहा है।

One such unique construction is happening in Katihar district of Bihar.
बिहार के कटिहार जिले में एक ऐसा ही नायाब कंस्ट्रक्शन हो रहा है

रवि वर्मा मूल रूप से कटिहार से जुड़े हुए और इन दिनों वह दलन गांव में अपने यूनिक स्कूल प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं। वह थाईलैंड में रहने वाले अपने एक दोस्त के कंस्ट्रक्शन के तरीके से बेहद प्रभावित होकर कटिहार में अपने स्कूल को 95 प्रतिशत बास और 5 प्रतिशत बालू, सीमेंट और ईंट के इस्तेमाल से पूरा कर रहे हैं।

Ravi Varma giving final touches to the unique school project
यूनिक स्कूल प्रोजेक्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं रवि वर्मा

इस तकनीक से बनाए गये भव्य आलीशान बिल्डिंग टिकाऊ होने के साथ-साथ खूबसूरत भी दिख रहा है। कोसी और सीमांचल में पहली बार क्लाइमेट फ्रेंडली और भूकंप रोधी इस तकनीक से बनाए गए मकान सबका आकर्षण का केंद्र बनते जा रहा है।

The school building has become the center of attraction in the entire district
पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है स्कूल का बिल्डिंग

शिक्षाविद रवि वर्मा के निर्देश पर काम करने वाले साइट मैनेजर मनोज सिंह और अमोल पासवान कहते हैं कि पहली बार जब उन लोगों के सामने इसका डिजाइन और इसको बनाने के तरीके पर बात रखी गई तो वह लोग चौक पड़े। मगर धीरे-धीरे रवि वर्मा के निर्देश पर इस भव्य आलीशान बिल्डिंग का निर्माण अब पूरा होने वाला है।

Boric acid and borax mixed with water is added to the cooked bamboo in a special way
बोरिक एसिड और बोरेक्स पानी में मिलाकर पका हुआ बांस विशेष तरीके से डाला जाता है

साइट मैनेजर अमोल कहते हैं कि आज तक उन लोगों ने इस तरीके से मकान नहीं बनाया था, क्योंकि यह बांस से जुड़ा हुआ इलाका है। मगर बांस में कीड़ा न लगे यह बहुत बड़ी चुनौती है।

इसलिए पहले बोरिक एसिड और बोरेक्स पानी में मिलाकर पका हुआ बांस विशेष तरीके से डाला जाता है। फिर पूरी तरह से बांस तैयार हो जाने के बाद इस बांस का इस्तेमाल निर्माण में होता है।

Bamboo is completely used in roof construction.
छत निर्माण में भी पूरी तरह बांस का ही इस्तेमाल होता है

इस निर्माण में मैग्नीशियम बोर्ड, ईपीडीएम रबर मेंबर, स्टील की जाली और रॉक वूल इस्तेमाल कर दीवारों को बनाया जाता है। छत निर्माण में भी पूरी तरह बांस का ही इस्तेमाल होता है।

बड़ी बात यह है कि इस निर्माण में ईट, सीमेंट और बालू से निर्माण वाले भवन से खर्च आधे से भी कम होता है और सुरक्षा मानकों की दृष्टि से भी यह बेहद सुरक्षित है। इसके अलावा यह देखने में भी बेहद खूबसूरत लगता है।

70 people are working at the construction site under the leadership of head mason Israful
निर्माण स्थल पर हेड मिस्त्री इसरफुल के नेतृत्व में काम कर रहे हैं 70 लोग

खासकर गर्मी के मौसम में यह घर के भीतरी हिस्से में मौसम को भी नियंत्रित रखने में बेहद प्रभावी है। फिलहाल इस निर्माण स्थल पर हेड मिस्त्री इसरफुल के नेतृत्व में 70 लोग काम कर रहे हैं। काफी यूनिक तरीके से बनाए जा रहे इस आलीशान बिल्डिंग का निर्माण कार्य अब पूरा होने वाला है।

Construction of this type of grand luxurious school building for the first time in Kosi and Seemanchal
कोसी और सीमांचल में इस तरह के भव्य आलीशान स्कूल बिल्डिंग का पहली बार निर्माण

कोसी और सीमांचल इलाके में इस तरह के भव्य आलीशान स्कूल बिल्डिंग का पहली बार निर्माण हो रहा है। जानकारों के अनुसार बिहार के अन्य इलाकों में भी ऐसे निर्माण अब तक न के बराबर है। भविष्य के लिए यह तकनीक निर्माण क्षेत्र में प्रभावी बन सकता है।