छठ महापर्व पर बिहार से लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में रही धूम, देखे तस्वीरें

Chhath Puja

काचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए… छठ का यह प्रसिद्ध गीत जो कभी बिहार के अंदर गूंजा करता था, आज पूरी धरती को गूंजायमान कर रहा है। सूर्य अराधना का लोक महापर्व छठ अब लोकल से ग्लोबल हो चुका है।

आज दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा हो जहां बिहारी रहते हों और छठ पर्व नहीं मनाते हों। अपनी विशिष्ठ प्रकृति और कड़े नियमों के कारण इस त्योहार ने दूसरी विरादरी के लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है।

Celebration of Chhath by Hindu families in Malaysia
मलेशिया में हिंदु परिवारों के द्वारा छठ का आयोजन

यहां तक कि हिंदू धर्म के पारंपरिक द्वेषी भी छठ के प्रति आदर का भाव रखते हैं। इसमें शामिल भी होते हैं। इस पर्व के दौरान इंसान- इंसान में कोई फर्क नहीं रह जाता।

छठ पर्व हो रहा ग्लोबल

छठ पर्व के लोकल से ग्लोबल होने के कई कारण हैं। इस व्रत के ग्लोबलाइजेशन का सबसे बड़ा कारण है बिहार के लोगों के अंदर परदेस के प्रति आकर्षण। जबकि ज्यादातर मानव होम सीकनेस अर्थात गृहताप से ग्रसित होते हैं।

Vratis performing Chhath Puja in Philippines
फिलिपिंस में छठ पूजा करती व्रती

अपनी जन्मभूमि के बाहर नहीं निकलना चाहते। बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों में ऐसी कोई ग्रंथि नहीं है। वे कहीं भी जाने को तैयार रहते हैं।

यही कारण है कि उन्हें जहां कहीं भी रोजगार का अवसर दिखा, निकलते चले गए। कुछ स्थाई तो कुछ अस्थाई रूप से। लेकिन वे जहां भी गए अपनी संस्कृति और रीति रिवाजों को साथ लेते गए।

सूर्य पूजा का सबसे बड़ा व्रत छठ पूजा

छठ पूजा को सूर्य पूजा का सबसे बड़ा व्रत मानते हैं। जो लोग पुर्वांचल से अन्य देशों में गए उन्होंने छिटपुट तरीके इसकी शुरुआत हुई लेकिन धीरे-धीरे यह व्यापक रूप लेता गया।

Devotees involved in Chhath fasting in Russia
रूस में छठ व्रत में शामिल भक्त

आज यह कनाडा, अमेरिका,रूस, ब्रिटेन और इटली समेत 20 से ज्यादा देशों में मनाया जाता है। 2020 में लंदन में टेम्स नदी के किनारे छठ के मौके पर फिल्मी सितारों का जमघट लगा था। वहां शूटिंग भी हुई थी। इस तरह गंगा से निकलकर छठ टेम्स तक पहुंच चुका है।

प्रवासी भारतीय अपने पर्व त्योहारों के जरिए संगठित होते गए और उनका एक समाज बनता गया। आज उनकी कई पीढियां गुजर चुकी हैं। लेकिन वे तमाम भारतीय पर्व त्योहार धूमधाम से मनाते हैं।

German woman celebrated Chhath in Gorakhpur
गोरखपुर में जर्मन महिला ने मनाया छठ

आज भी वे छठ के मौके पर कांचहि बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए जैसे गीत गाते हैं। यह गीत कई सदियों की वाचिक परंपरा का हिस्सा रहा है।

लोगों का मानना है कि इसका सकारात्मक, नकारात्मक प्रभाव तत्काल पड़ता है। मनोकामनाएं तुरंत पूरी होती हैं। इस कारण भी यह गैर बिहारियों को आकर्षित करता है।

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