बिहार मे क्रिकेट का सपना कब होगा पूरा, पिछले 4 वर्ष में जानिए

बिहार में भले ही अब तक इंटरनेशनल स्टेडियम बनकर तैयार नहीं हुई है पर अब भी हमारे बिहार के लोगों में क्रिकेट को लेकर रूचि जरा सा भी नहीं घटा है क्रिकेट के मामले में अगर देखा जाए तो हमारे बिहार राज्य के युवा अभी भी देश भर में सबसे अधिक रूचि रखते हैं जो कि आज भी आपको बिहारी के हर गली, मोहल्लों एवं सड़कों पर युवा खेलते नजर आएंगे तो वही सालों से मेहनत कर रहे युवा के पास बिहार में इसकी कोई विकल्प नहीं होने की वजह से कई अन्य राज्य व शहर को स्थानांतरित हो जाते हैं।

आपको बता दूं कि 2007 में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बनते ही इंटरनेशनल स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी जिस समय राज्य के लाखों खेल प्रेमियों और सैकड़ों खिलाड़ियों के आंख में सपना साकार होने की उम्मीद जग गई थी इस घोषणा के बाद इस योजना को स्वीकृति होने में ही 11 वर्ष लग गए जबकि अब पिछले 4 साल से काम चल रहे हैं जिस में भी अब तक मात्र लगभग 40 परसेंट कार्य ही पूरा हो सकी है जबकि झारखंड जैसे छोटी राज में विश्वस्तरीय स्टेडियम मात्र 2 वर्ष में ही बंद कर उस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैच आयोजित कर दी गई थी इसीलिए कहा जाता है कि बिहार में योजनाएं तो बहुत ही अच्छी अच्छी बनती है पर उनके कार्य प्रगति कुछ खास नही होते हैं।

इस वर्ष बिहार दिवस के दिन पर नालंदा में विश्वस्तरीय स्टेडियम के उद्घाटन की दावा की गई थी पर इस 740 करोड़ के 90 एकड़ में बन रहे स्टेडियम की उद्घाटन समारोह का कोई असर नहीं दिख रहा है इसे गया में राजगीर की पिलखि पंचायत के थेरा गांव में बनाया जा रहा है जिसे राज्य कैबिनेट के द्वारा 2016 में ही अप्रूवल कर दि गई थी जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस स्टेडियम की नींव 2018 में ही रखी गई थी जिसका निर्माण 2020 तक करके इसकी उद्घाटन कर दी जानी थी पर अब तक इसकी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुई है।, चित्र काल्पनिक